National Overseas Scholarship 2026: आर्थिक रूप से कमजोर और कम आय वाले परिवारों और वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली छात्रों को विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 'नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप' की शुरुआत की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों का अक्सर विदेश के बेस्ट संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने का सपना होता है। लेकिन आर्थिक कारणों से वह होनहार और प्रतिभाशाली होने के बावजूद भी पीछे रह जाते है, जिसके कारण उनका सपना एक सपना रह जाता है। इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप' (NOS) की शुरुआत की गई है। यह केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो विदेश के शीर्ष संस्थानों से मास्टर डिग्री या पीएचडी की पढ़ाई करने के इच्छुक मेधावी छात्रों को पूरी तरह से वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने युवाओं को इस स्कॉलरशिप के लिए प्रेरित करते हुए अपने आधिकारिक एक्स (X) पोस्ट में कहा है कि छात्र बड़े सपने देखें और इस योजना का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करें। अगर आपका भी सपना है कि आप विदेश से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करें तो आपके लिए यह स्कॉलरशिप बहुत लाभकारी है आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताएं।
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) क्या है?
सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप है क्या? बता दें कि यह केंद्र सरकार की एक विशेष आर्थिक सहायता पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को विदेश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का अवसर देना है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार आ सके और वह अपने सपने की दिशा में उड़ान भर एक बेहतरीन करियर की दिशा में कदम रख सकें।
कितनों को मिलेगी यह स्कॉलरशिप
हम सभी जानते हैं कि स्कॉलरशिप कुछ ही उम्मीदवारों को मिल पाती है। उसी प्रकार फंड की उपलब्धता के आधार पर इस योजना के तहत हर साल कुल 125 नए अवॉर्ड यानी स्कॉलरशिप) दिए जाते हैं।
कौन कर सकता है नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए आवेदन
इस स्कॉलरशिप के लिए केवल एससी, डी-नोटिफाइड, खानाबदोश, अर्ध-खानाबदोश जनजातियां, भूमिहीन खेतिहर मजदूर और पारंपरिक कारीगर आवेदन कर सकते हैं। स्कॉलरशिप योजना में इन सभी के आधार पर स्लॉट बांटे गए हैं।

National Overseas Scholarship 2026 (Photo - AI)
इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पिछली डिग्री में 60 प्रतिशत मार्क्स होने अनिवार्य है। उदाहरण के लिए अगर आप पीएचडी करना चाहते हैं तो मास्टर में आपके कम से कम 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए। अगर आप मास्टर की शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं को बैचलर की डिग्री में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
- स्कॉलरशिप के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 तय की गई है। इससे अधिक आयु के उम्मीदवार आवेदन के पात्र नहीं होंगे।
- जिन उम्मीदवारों की पारिवारिक इनकम 8 लाख से अधिक है वह इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। इससे कम इनकम वाले परिवारों के बच्चे आवेदन के पात्र है।
क्या महिलाओं के लिए है कोई विशेष प्रावधान?
इस योजना में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कुल स्वीकृत स्लॉट में से 30% सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। जी हां, विभिन्न श्रेणियों के आधार पर बांटे गए स्लॉट में कुल 30 प्रतिशत सीटें महिला उम्मीदवारों की होगी।
स्कॉलरशिप के लाभ?
यह स्कॉलरशिप विदेशों के सरकार या अधिकृत संस्थाओं द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और संस्थानों में पढ़ाई के लिए दी जाती है। इसमें छात्रों की पढ़ाई के लिए फंड का ट्रांसफर मंत्रालय द्वारा स्कॉलरशिप के माध्यम से सीधे विदेश में स्थित भारतीय मिशनों को उपलब्ध कराया जाता है। भारतीय मिशन सीधे विश्वविद्यालयों या छात्रों को ट्यूशन फीस, मेंटेनेंस अलाउंस (रहने-खाने का खर्च) और अन्य स्वीकृत भत्तों का भुगतान करते हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें - Maharashtra Board Exam 2027: महाराष्ट्र बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन शुरू, लेट फीस के साथ यहां चेक करें लास्ट डेट, ऐसे करें आवेदन
छात्र इन बातों का रखें खास ध्यान
इस योजना के तहत आम तौर पर उन्हीं विदेशी विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता दी जाती है जिनकी वैश्विक रैंकिंग (QS World University Rankings) शीर्ष 500 में होती है। इसलिए अपने एडमिशन का प्रयास हमेशा नामी यूनिवर्सिटीज में ही करें। इसके साथ ही योजना का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवार के परिवार की कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर होनी अनिवार्य है, इसलिए आवेदन से पहले अद्यतन आय प्रमाण पत्र तैयार रखें और इससे संबंधित अधिक जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट पर चेक करें। आवेदन करने से पहले उम्मीदवार स्कॉलरशिप के लिए आवश्यक दस्तावेज भी तैयार करें।
