फ्रांस में स्कूलों की व्यवस्था को लेकर छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं, शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी तथा पढ़ाई के लंबे घंटों समेत कई मुद्दों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन तेजी से फैल रहा है। शुक्रवार को देशभर में सैकड़ों स्कूल प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों की वजह से प्रभावित हुए। कई जगह स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए, जबकि पेरिस और ल्योन समेत कुछ शहरों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
फ्रांसीसी शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को 564 हाईस्कूलों में प्रदर्शन या किसी तरह की बाधा दर्ज की गई। सरकार को आशंका थी कि देश के करीब 3,700 हाईस्कूलों में से लगभग 400 स्कूलों को बंद रखना पड़ सकता है। कई शिक्षण संस्थानों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाया।
अन्य देशों की तुलना में पिछड़ रही है फ्रांस की शिक्षा प्रणाली
फ्रांस में इस बात को लेकर व्यापक चिंताएं हैं कि वहां की शिक्षा प्रणाली अन्य देशों की तुलना में पिछड़ रही है और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों को सामाजिक सीढ़ी पर ऊपर चढ़ने में सक्षम बनाने के अपने मिशन में विफल हो रही है। विश्व भर के छात्रों का मूल्यांकन करने वाली नवीनतम पीआईएसए रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक सुविधाप्राप्त और अत्यधिक वंचित छात्रों के बीच प्रदर्शन का अंतर बढ़ रहा है, और पठन बोध और गणित में समग्र अंकों में भारी गिरावट आई है।
सितंबर में शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर सरकार ने हाई स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगा दिया था। अधिकारियों का तर्क था कि स्क्रीन से दूरी बनाने से पढ़ाई में सुधार होगा। इस साल फ्रांस यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने उस फैसले को रद्द कर दिया।
आखिर छात्रों का गुस्सा क्यों फूटा?
छात्रों का कहना है कि मौजूदा स्कूल व्यवस्था उनकी जरूरतों के मुताबिक नहीं है। उनका आरोप है कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और कक्षाओं में विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल नहीं मिल रहा। पढ़ाई के लंबे घंटे भी छात्रों की प्रमुख शिकायतों में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ स्कूलों में अत्यधिक गर्मी और पर्याप्त संसाधनों की कमी की बात कही जा रही है। शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का भी दावा किया गया है।छात्र स्कूलों के बजट में कटौती के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा पर खर्च कम होने का सीधा असर स्कूलों की सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
पेरिस से दूसरे शहरों तक फैला आंदोलन
यह विरोध पिछले सप्ताह राजधानी पेरिस से शुरू हुआ था। इसके बाद धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों में भी छात्र सड़कों पर उतरने लगे। शुक्रवार को कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के मुख्य द्वार बंद कर दिए। पेरिस में लियोनार्ड डी विंची और गैस्टन-बाशेलार्ड हाईस्कूल के प्रवेश द्वारों के पास आग लगने की घटनाएं हुईं। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। ल्योन में भी विरोध के दौरान आगजनी की खबर सामने आई। दक्षिणी शहर मार्सेई में स्थिति को देखते हुए कुछ स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए दूरस्थ शिक्षा की तैयारी की। यानी स्कूल बंद होने की स्थिति में पढ़ाई ऑनलाइन जारी रखने की व्यवस्था की गई।170 छात्र घायल, 65 से ज्यादा कर्मचारी भी जख्मी
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे के मुताबिक, आंदोलन शुरू होने के बाद से करीब 170 छात्र घायल हो चुके हैं। इसके अलावा कम से कम 65 स्कूल कर्मचारी भी चोटिल हुए हैं। घायल कर्मचारियों में लगभग 40 हाईस्कूलों के प्रधानाचार्य शामिल बताए गए हैं। सरकार के अनुसार, विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 100 से ज्यादा हाईस्कूलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इस वजह से कई स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।2 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया
फ्रांस के न्याय मंत्री जेराल्ड डरमानिन ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनके अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में लगभग 90 प्रतिशत नाबालिग हैं। न्याय मंत्री ने अभियोजकों से प्रदर्शन के दौरान नाबालिगों द्वारा की गई तोड़फोड़ के मामलों में उनके माता-पिता की जिम्मेदारी तय करने और नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है।पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल
जहां सरकार हिंसा और आगजनी की घटनाओं की आलोचना कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि कई जगह पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया और आंसू गैस छोड़ी। पश्चिमी फ्रांस के ब्रेस्ट में केरिशेन हाईस्कूल के आसपास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। रेनेस में भी प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने की खबरें सामने आईं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से स्थिति और तनावपूर्ण हुई।सरकार बोली- आंदोलन में घुसे हिंसक समूह
फ्रांसीसी सरकार ने छात्रों की शिक्षा से जुड़ी कई शिकायतों को स्वीकार किया है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा मंत्री गेफ्रे का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने छात्र आंदोलन में दखल देकर इसे प्रभावित किया है। सरकार की ओर से अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को हिंसक प्रदर्शन का हिस्सा बनने से रोकें और उन्हें स्कूलों के आसपास चल रहे टकराव से दूर रखें।राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक रंग
फ्रांस में अगले राष्ट्रपति चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे समय में छात्र आंदोलन ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। सरकार ने वामपंथी दल France Unbowed (LFI) और उसके नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों पर आंदोलन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। मेलेंशों आगामी राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर उम्मीदवार हैं। हालांकि, छात्र आंदोलन से जुड़े राजनीतिक आरोपों के बीच मुख्य मुद्दा स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की शिकायतें बनी हुई हैं।फिलहाल फ्रांस में छात्र आंदोलन जारी है। सरकार के सामने एक तरफ स्कूलों की व्यवस्थागत समस्याओं से जुड़ी मांगों से निपटने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रदर्शन के दौरान हो रही आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ टकराव को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी है।
