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MCD School Scheme 2026: एमसीडी के छात्रों को यूनिफॉर्म और बैग के लिए मिलेंगे 1, 370 रुपये, लाखों छात्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर होंगे 70 करोड़

MCD School Scheme 2026: एमसीडी द्वारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के तहत 5.1 लाख पात्र बच्चों के अकाउंट में कुल 70 करोड़ रुपये की राशि यूनिफॉर्म और बैग के लिए ट्रांसफर की जाएगी।

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MCD School Scheme 2026 (Photo - AI/Newsroom Verified)

MCD School Scheme 2026: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपने प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक राहत भरी खबर दी है। निगम इसी हफ्ते से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रों को यूनिफॉर्म और स्कूल बैग की खरीद हेतु सीधे उनके बैंक खातों में आर्थिक सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना के तहत पहले चरण में लगभग 5.1 लाख पात्र बच्चों के खातों में कुल 70 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। निगम प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय पर वित्तीय मदद मिलने से छात्रों की पढ़ाई और मूलभूत जरूरतों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।

किन्हें मिलेगा योजना का लाभ

एमसीडी (MCD) के अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों में पूरे साल दाखिले (Admission) और नाम कटने की प्रक्रिया चलती रहती है। इसलिए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर साल 31 अगस्त की कट-ऑफ तारीख तय की जाती है। इसकी तारीख के आधार पर छात्रों को इस योजना का लाभ मिलेगा।

कुल पात्र छात्र - शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 31 अगस्त तक कुल 6, 56, 950 छात्रों को इस योजना के योग्य पाया गया है।

पहले चरण के लाभार्थी - फिलहाल 5.1 लाख बच्चों की बैंक डिटेल्स उपलब्ध हैं, जिन्हें पहली किश्त का लाभ तुरंत मिल रहा है।

शेष छात्रों की योजना - जिन 1.47 लाख से अधिक बच्चों के बैंक खाते नहीं हैं या निष्क्रिय (Inactive) हैं, उनके नए खाते खुलवाने और बैंक डिटेल्स अपडेट करने का काम तेजी से चल रहा है।

प्रति छात्र वित्तीय सहायता और बजट का ये है ब्योरा

विवरणआवंटित राशि (रुपये में)
स्कूल यूनिफॉर्म हेतु1,250 रुपये
स्कूल बैग हेतु120 रुपये
कुल डीबीटी (DBT) राशि1,370 (प्रति छात्र) रुपये
प्रथम चरण का कुल खर्चलगभग ₹69.87 करोड़

स्टेशनरी वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव

एमसीडी ने इस सत्र से स्टेशनरी वितरण के नियम में भी कई आवश्यक और बड़े बदलाव किए हैं। पहले छात्रों को डीबीटी के माध्यम से कुल 1, 670 रुपये दिए जाते थे, जिसमें 300 रुपये नोटबुक और स्टेशनरी की खरीद के लिए शामिल थे। अब छात्रों को स्टेशनरी के लिए 300 रुपये कैश देने की बजाय निगम स्कूलों के माध्यम से सीधे नोटबुक और स्टेशनरी खरीदेगा और बच्चों में बांटेगा। बता दें कि इस बदलाव का मुख्या कारण पिछले सत्रों में देखा गया था कि बैंक खाते न होने या तकनीकी गड़बड़ी के कारण पैसे मिलने में देरी हो जाती थी, जिससे बच्चे पढ़ाई की जरूरी सामग्री समय पर नहीं खरीद पाते थे। अब स्कूलों द्वारा सीधे स्टेशनरी मिलने से पढ़ाई का नुकसान नहीं होगा।

बैंक खातो के इनेक्टिव होने पर क्या होगा?

अक्सर बैंक खातों के एक्टिव न होने या अभिभावकों के पास वैध खाते न होने से पैसे अटक जाते थे। इस बार निगम प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी छात्र इस लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए स्कूलों के स्तर पर विशेष प्रयास करके अभिभावकों के बैंक खाते खुलवाए जा रहे हैं और निष्क्रिय खातों को एक्टिव किया जा रहा है, ताकि शेष बचे छात्रों के खातों में भी जल्द से जल्द सहायता राशि भेजी जा सके।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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