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पक्षियों के किस समूह को कहा जाता है 'मर्डर'? जानें क्या है इसका रहस्य

आसमान में उड़ते पक्षियों के झुंड मन मोह लेते हैं। अंग्रेजी में इनके समूहों के दिलचस्प नाम हैं, जैसे उल्लुओं को 'पार्लियामेंट' कहते हैं। ठीक उसी तरह से एक पक्षी है, जिसके ग्रुप को 'मर्डर' कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह है।

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पक्षियों के किस समूह को कहा जाता है 'मर्डर' (Photo - AI)

सुबह की शांत बेला हो या ढलती हुई शाम, आसमान में उड़ते पक्षियों के झुंड को देखना हमेशा एक सुकून भरा अहसास देता है। कभी ये पक्षी अंग्रेजी के 'V' आकार में उड़ते दिखाई देते हैं, तो कभी आसमान में एक जादुई पैटर्न बनाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और कवियों ने पक्षियों की इन टोलियों को हमेशा सुंदरता और स्वतंत्रता से जोड़ा है। अलग-अलग पक्षियों के समूहों के लिए अंग्रेजी भाषा में कई दिलचस्प नाम हैं। जैसे उल्लुओं के समूह को 'पार्लियामेंट' (Parliament) कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पक्षियों की इसी खूबसूरत दुनिया में पक्षियों इस झुंड को दिया यह नाम ऐसा है, जिसे सुनते ही जेहन में अपराध और एक खौफनाक मंजर सामने आता है, क्योंकि पक्षियों के इस ग्रुप का नाम 'मर्डर' है। आइए जानते हैं आखिर कौन सा है वह पक्षी और क्यों उसके कुनबे को इस डरावने नाम से पुकारा जाता है?

इस डरावने नाम के पीछे का असली सच

सस्पेंस को पीछे छोड़ते हुए अगर सीधे तौर पर बात की जाए, तो कौओं (Crows) के समूह या झुंड को अंग्रेजी में 'ए मर्डर ऑफ क्रोज' (A Murder of Crows) कहा जाता है। सुनने में यह नाम भले ही किसी आपराधिक घटना जैसा लगता हो, लेकिन आपको बता दें कि इसके पीछे पक्षियों की कोई हिंसक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि सदियों पुरानी भाषा की परंपरा, पौराणिक मान्यताएं हैं।

पौराणिक मान्यताएं और इतिहास का नजरिया

मध्यकाल के दौरान लोककथाओं और पुरानी मान्यताओं में कौओं को अक्सर मृत्यु, दुर्भाग्य और रहस्य का प्रतीक माना जाता था। पुराने समय में जब दो राज्यों के बीच भीषण युद्ध होता था, तो युद्ध खत्म होने के बाद मैदान में मृत सैनिकों के शवों को खाने के लिए भारी संख्या में कौए इकट्ठा हो जाते थे। और यही वजह है कि लोग कौओं के इस जमावड़े को सीधे तौर पर मृत्यु या 'मर्डर' से जोड़कर देखने लगे।

कौओं की अपनी 'अदालत'

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता था कि कौए आपस में मिलकर एक 'अदालत' लगाते हैं। माना जाता है कि अगर उनके समूह का कोई सदस्य उनके नियमों को तोड़ता है, तो बाकी सभी कौए मिलकर उस पर हमला कर देते हैं और कई बार उसे जान से भी मार देते हैं। इस व्यवहार के कारण भी उनके झुंड को मर्डर का नाम दिया गया।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक व्यवहार

अगर वैज्ञानिक नजरिए से बात करें, तो साइंटिस्ट का मानना है कि कौए बेहद बुद्धिमान, चतुर और सामाजिक पक्षी होते हैं। उनका झुंड में रहना उनकी आपसी सुरक्षा का एक बेहतरीन जरिया है। जब भी कभी कहीं किसी कौए की मौत होती है या कोई शिकारी उन पर हमला करता है तो, सैंकड़ों की तादाद में कांव-कांव चिल्लाते हुए कौए वहां जमा हो जाते हैं। ऐसा वह खतरा भांपते हुए एक दूसरे को सतर्क करने के लिए करते हैं। इस तरह कौओं को भारी संख्या में शोर मचाते हुए इकट्ठा होना इंसानों के लिए काफी डरावना होता है, इस वजह से भी इनके ग्रुप को यह डरावना नाम दिया गया है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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