Kartavyam Constitution lecture series begins at DU Campus Law Center: दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर ने कर्तव्यम् नामक एक ऐतिहासिक और पहली बार आयोजित की जा रही संविधान व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ किया गया। जानकारी के अनुसार, यह श्रृंखला भारतीय संविधान के 75 वर्षों को समर्पित है और एक नए राष्ट्रीय विमर्श की शुरुआत करती है जो कर्तव्य न्यायशास्त्र (Duty Jurisprudence) पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य भारतीय दार्शनिक एवं संवैधानिक परंपरा में निहित उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के साथ सामाजिक एवं विधिक चिंतन को फिर से जोड़ना है। उद्घाटन संगोष्ठी में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा, माननीय न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और आर. वेंकटरमणि, भारत के अटॉर्नी जनरल मौजूद रहे। यह व्याख्यान श्रृंखला 4 अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक चलेगी, जिसमें 30 से अधिक प्रतिष्ठित न्यायाधीश, अधिवक्ता और विद्वान भाग लेंगे। इसमें केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और NHRC व NCW जैसे वैधानिक निकायों के साथ सहयोगात्मक सत्र शामिल होंगे।
कर्तव्यम् एक परिवर्तनकारी विधिक विमर्श को आगे बढ़ाता है, जो अधिकार-केंद्रित सोच से हटकर कर्तव्य-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर समाज को प्रेरित करता है। यह भारतीय संविधान के आदर्शों और संविधान सभा की दृष्टि को फिर से जीवंत करता है, जहाँ कर्तव्य को सामाजिक सौहार्द का मूल आधार माना गया है। नॉलेज कलेक्टिव इस पहल का नॉलेज पार्टनर है।
क्या बोले डीयू के कुलपति
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह के संरक्षण में शुरू हुई इस पहल में प्रो. (डॉ.) अल्का चावला, प्रोफेसर-इन-चार्ज, कैंपस लॉ सेंटर संरक्षक के रूप में जुड़ी हैं। उन्होंने कर्तव्यम् को एक ऐसा परिवर्तनकारी आह्वान बताया जिसे भारत की संवैधानिक यात्रा में मील का पत्थर माना जाएगा। डॉ. सीमा सिंह, प्रोग्राम डायरेक्टर, इस विचारशील पहल के पीछे प्रेरणास्रोत हैं। उनका उद्देश्य एक वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है, जो कर्तव्य आधारित परिवर्तन में निहित हो और वैश्विक अकादमिक विमर्श में कर्तव्यम् स्कूल ऑफ थॉट को स्थापित करे।
गोष्ठी में हुए संबोधनों में वक्ताओं में भारतीय परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों तथा डॉ. आंबेडकर एवं डॉ. राधाकृष्णन जैसे चिंतकों की दृष्टि का उल्लेख किया। न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कर्तव्यम् को एक साधना बताया, जहां अधिकार और कर्तव्य को सूर्य और सूर्यप्रकाश के समान अपरिवर्तनीय और जीवनदायी बताया। वहीं वेंकटरमणि ने कर्तव्य-केंद्रित दृष्टिकोण से विधायी पुनर्विचार की आवश्यकता बताई और ह्यूमन ड्यूटीज़ एक्ट जैसे क्रांतिकारी विचार की प्रस्तावना रखी।
छात्रों और शिक्षाविदों के लिए अवसर
इस व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत कर्तव्यम् सभी छात्रों, शोधार्थियों, अधिवक्ताओं और शोधकर्ताओं से शोध-पत्र आमंत्रित करता है। शीर्ष 100 प्रविष्टियों को कई अवसर प्राप्त होंगे। बता दें कि 25 सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप, 50 दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप, 25 राष्ट्रीय आयोगों में इंटर्नशिप के अवसर के साथ उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
कैसे हो सकते हैं शामिल
कर्तव्यम् श्रृंखला हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी और इसे दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट kartavyam.du.ac.in तथा कर्तव्यम् के यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकेगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा संवैधानिक कर्तव्यों पर आधारित विधिक विमर्श बनने की ओर अग्रसर है, जो जिम्मेदार नागरिकों और विधिक विचारकों की नई पीढ़ी को आकार देगा।
