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JPSC-JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ रांची में छात्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी, पूर्व सीएम रघुवर दास ने सरकार को घेरा

Jharkhand Paper Leak 2026: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर अभ्यर्थी रांची की सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं।

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Jharkhand Paper Leak

Jharkhand Paper Leak 2026: न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में बार-बार पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी और प्रशासनिक लापरवाही से परेशान अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर अभ्यर्थी रांची की सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं। छात्रों के इस आंदोलन का आज तीसरा दिन है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक भर्ती व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं किए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।

पेपर लीक, ब्लैकलिस्टेड कंपनी और अनियमितताओं के गंभीर आरोप

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि राज्य की भर्ती परीक्षाओं में लगातार बड़े पैमाने पर धांधली सामने आ रही है। आंदोलन में शामिल छात्रा रेखा राणा ने JPSC और JSSC CGL की परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

  • JPSC परीक्षा प्रक्रिया को संभालने का काम एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंपा गया।
  • टीम सदस्यों की आधिकारिक मंजूरी के बिना ही आनन-फानन में JPSC PT का रिजल्ट जारी कर दिया गया।
  • JSSC की परीक्षाओं में कई अभ्यर्थियों को परीक्षा खत्म होने के बाद एडमिट कार्ड जारी किए गए।
  • वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी अर्चना कुमारी ने कहा कि केवल अधिकारियों का इस्तीफा ले लेना इस समस्या का हल नहीं है। सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी और व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी सरकार पर बोला हमला

रांची में चल रहा छात्रों का यह सत्याग्रह अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। इससे पहले भी अभ्यर्थियों ने मोराबादी स्थित बापू वाटिका के समक्ष अपनी आवाज उठाई थी। इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में आयोजित हुई लगभग सभी भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष नहीं रहीं और ज्यादातर मामले अदालती विवादों में फंस गए। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल (2014-2019) के दौरान पारदर्शी प्रक्रिया और प्रतिष्ठित एजेंसियों के जरिए 1.33 लाख से अधिक युवाओं को समयबद्ध तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई थीं।फिलहाल, छात्र रांची में डटे हुए हैं और पेपर लीक रोधी कड़े कानून तथा पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे हैं।

आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन और प्रेस रिलीज पर ही भरोसा रखें

आंदोलन या विवाद के समय सोशल मीडिया पर परीक्षा रद्द होने या नई तारीखों को लेकर कई फर्जी नोटिस वायरल होते हैं। अभ्यर्थी किसी भी भ्रामक खबर से बचने के लिए केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (jpsc.gov.in या jssc.nic.in) पर जारी बुलेटिन को ही सत्य मानें।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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