NEET UG 2026 में अच्छी रैंक लाना सिर्फ आधी लड़ाई है। असली खेल काउंसलिंग के दौरान शुरू होता है। यहां की गई एक छोटी चूक भी आपके MBBS सीट के सपने पर पानी फेर सकती है। गलत पेपर अपलोड करना, देर से रजिस्ट्रेशन करना या बिना सोचे कॉलेज चुनना जैसी गलतियां बहुत भारी पड़ती हैं। अगर आप भी इस साल NEET UG काउंसलिंग में बैठने वाले हैं, तो अभी से इन 5 आम गलतियों से बचकर चलें।
1. डॉक्यूमेंट आखिरी समय पर इकट्ठा करना
बहुत से छात्र शेड्यूल आने के बाद सर्टिफिकेट ढूंढना शुरू करते हैं। इससे भागदौड़ होती है और डेडलाइन निकल भी सकती है। ऐसे में सलाह है कि अभी से 10वीं-12वीं मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, एडमिट कार्ड, पहचान पत्र, कैटेगरी सर्टिफिकेट आदि स्कैन करके एक फोल्डर बना लें। फाइलों का नाम साफ-साफ रखें ताकि अपलोड करते समय दिक्कत न हो।
2. AIQ और स्टेट काउंसलिंग
कई लोग सोचते हैं कि एक बार रजिस्टर करने से पूरे देश के कॉलेज मिल जाएंगे। ऐसा नहीं होता। ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन और नियम होते हैं। अपनी योग्यता के हिसाब से दोनों की जानकारी लें और जहां जरूरत हो वहां अलग से अप्लाई करें।
3. काउंसलिंग के टर्म बिना समझे फॉर्म भरना
फॉर्म खुलते ही जल्दी में भरने से Freeze, Float, Withdraw जैसे ऑप्शन में कन्फ्यूजन हो जाता है। Freeze: आपको मिली सीट ठीक है, आगे अपग्रेड नहीं चाहिए। Float: अभी वाली सीट रखते हुए अगले राउंड में बेहतर सीट की उम्मीद रखना। Withdraw: काउंसलिंग से नाम वापस लेना। इनका मतलब पहले समझ लें वरना बाद में पछताना पड़ सकता है।
4. सिर्फ नाम देखकर कॉलेज चुन लेना
चॉइस भरते समय सिर्फ कॉलेज का नाम टॉप पर रख देना सही नहीं है। फीस कितनी है, हॉस्टल है या नहीं, अस्पताल की सुविधाएं कैसी हैं, फैकल्टी और लोकेशन कैसी है, ये सब देखें। पिछले 2-3 साल का कटऑफ और सीट मैट्रिक्स भी जरूर चेक करें। इससे आपको अंदाजा लगेगा कि आपकी रैंक पर कौन सा कॉलेज मिल सकता है।
5. आखिरी दिन तक रुकना
रजिस्ट्रेशन के अंतिम दिन वेबसाइट स्लो हो जाती है। सर्वर डाउन या डॉक्यूमेंट की गलती से फॉर्म अधूरा रह सकता है।जैसे ही पोर्टल खुले, फॉर्म भर दें। सबमिट करने से पहले नाम, फोन नंबर, ईमेल, NEET स्कोर, रैंक और कैटेगरी दोबारा चेक कर लें।
सिर्फ MCC की और संबंधित राज्य काउंसलिंग की ऑफिशियल साइट पर जो नोटिफिकेशन आए वही फाइनल मानें। थोड़ी तैयारी अभी कर लेंगे तो काउंसलिंग के समय परेशानी कम होगी और एडमिशन का रास्ता आसान हो जाएगा।
