भारतीय विश्वविद्यायों और तकनीकी संस्थानों में बड़ी संख्या में पेटेंट दाखिल किये जाते हैं मगर उनके सही मूल्यांकन और उपयोग की व्यवस्था मजबूत न होने की वजह से कई पेटेंट बेकार हो जाता हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेटेंट ऑडिट की कमी और रिसर्च का पूरा लाभ समाज और उद्योग तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। इस संबंध में ट्रिपलआईटी से जुड़े शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट पब्लिश की है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत में पेटेंट ऑडिट की व्यवस्था अब भी पर्याप्त रूप से नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों में बड़ी संख्या में पेटेंट फाइल किये जाते हैं लेकिन उनमें से कईयों का व्यावसायिक उपयोग नहीं हो पाता है।
बेहद उपयोगी हैं पेटेंट्स
रिपोर्ट में बताया गया है कि जागरूकता की कमी, बजट की समस्या, प्रक्रिया में देरी और संस्थागत ढांचे की कमजोरियां इसके प्रमुख कारण हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेटेंट ऑडिट के जरिये ये पता लगाया जा सकता है कि कौन से पेटेंट उपयोगी हैं और किनका व्यवसायिक और सामाजिक महत्व है।
शोधकर्ताओं के अनुसार विकसित देशों में पेटेंट ऑडिट की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित है, जिससे पेटेंट का बेहतर उपयोग और संरक्षण संभव हो पाता है। भारत में भी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को नियमित पेटेंट ऑडिट अपनाने की जरूरत है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल टूल्स की मदद से पेटेंट ऑडिट को और भी ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। एआई टेक्नीक पेटेंट से जुड़े बड़े डेटा का विश्लेषण करके उनके उपयोग, संभावनाओं और आर्थिक मूल्य का आकलन करने में मदद कर सकती है।
पेटेंट ऑडिट हो अनिवार्य
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर पेटेंट ऑडिट को संस्थागत स्तर पर अनिवार्य बनाया जाए तो फिर विश्वविद्यालयों में होने वाले रिसर्च का लाभ उद्योग, अर्थव्यवस्था और समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाएगा।
