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DU में कितने विषय में फेल होने पर लगती है बैक? जानिए क्या हैं पासिंग मार्क्स और ईयर बैक के नियम

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में बैक और ईयर बैक को लेकर नियम के बारे में जानने के साथ यह जानना जरूरी है कि 'बैक कैसे लगती है' और 'ईयर बैक कैसे लगती है', ताकि आप इससे बच सकें।

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DU में कितने विषय में फेल होने पर लगती है बैक (Photo - AI)

How Many Failed Subjects Lead to Backlog and Year Back at DU: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है, जहां हर साल लाखों छात्र ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त करने के लिए दिल्ली आते हैं। डीयू में पढ़ाई का माहौल जितना कम्पेटिटिव है, यहां की परीक्षा और क्रेडिट सिस्टम के नियम भी उतने ही व्यवस्थित हैं। डीयू में एडमिशन लेने वाले नए छात्रों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है और वह है "बैक" (Backlog)। परीक्षा में 'बैक' (ER - Essential Repeat) कब लगती है? कितने विषय में फेल होने पर साल खराब यानी 'ईयर बैक' (Year Back) लग सकती है? दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए हर छात्र के लिए इन अकादमिक नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

डीयू एग्जाम सिस्टम

दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्तमान में सेमेस्टर और क्रेडिट आधारित सिस्टम लागू है। किसी भी विषय में पास होने के लिए छात्र को दो मुख्य घटकों में न्यूनतम अंक प्राप्त करने होते हैं। पहला है इंटरनल असेसमेंट, जिसमें असाइनमेंट, क्लास टेस्ट, अटेंडेंस और प्रैक्टिकल परीक्षाएं शामिल है। वहीं दूसरा है सेमेस्टर एग्जाम, जो सेमेस्टर खत्म होने पर होता है और इस परीक्षा में पास होना जरूरी है।

सामान्य नियमानुसार, किसी भी पेपर में पास होने के लिए छात्र को थ्योरी और प्रैक्टिकल/असेसमेंट दोनों को मिलाकर न्यूनतम 40% अंक लाने अनिवार्य होते हैं। यदि कोई छात्र 40% से कम अंक पाता है या परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो उसे उस विषय में उसे फेल यानी Essential Repeat (ER) घोषित कर दिया जाता है।

डीयू में बैक कब लगती है?

यदि आप किसी एक सेमेस्टर में एक या दो विषयों में 40% अंक नहीं ला पाते हैं, तो उन विषयों में आपकी बैक (ER) आ जाती है। दिल्ली विश्वविद्यालय में 'बैक' लगने का मतलब पढ़ाई से बाहर होना नहीं है। बल्कि आपको आपके अंक सुधारने का एक मौका दिया जाता और आपको आगे अगले सेमेस्टर में प्रमोट किया जाता है। इसमें आपकी आगे की पढ़ाई पर रोक नहीं होती है। जिस विषय में आप फेल हैं, उसे दोबारा देना होता है।

बैक का पेपर कब दे सकते हैं?

बैक के पेपर को लेकर एक आसान नियम है, जिसके अनुसार, ऑड सेमेस्टर यानी 1, 3 और 5 सेमेस्टर के पेपर अगले ऑड सेमेस्टर में दिए जा सकते हैं। ठीक उसी प्रकार के इवन सेमेस्टर के पेपर अगले इवन सेमेस्टर में देने होते हैं।

ईयर बैक कैसे और कब लगती है?

डीयू में 'ईयर बैक' का मतलब है कि छात्र को अगले साल में प्रमोट नहीं किया जाएगा और छात्र को पूरा साल दोबारा दोहराना होगा। डीयू के प्रमोशन रूल्स के अनुसार, प्रथम वर्ष से द्वितीय वर्ष या द्वितीय वर्ष से तृतीय वर्ष में प्रमोट होने के लिए क्रेडिट और विषयों की एक न्यूनतम शर्त होती है।

1. 50% विषयों को पास करना अनिवार्य

एक शैक्षणिक वर्ष में कुल दो सेमेस्टर होते हैं। मान लीजिए कि आपके प्रथम वर्ष में दोनों सेमेस्टर मिलाकर कुल 8 विषय हैं। अगले वर्ष (द्वितीय वर्ष) में प्रमोट होने के लिए आपको कम से कम 50% विषय यानी 4 पेपर पास करने अनिवार्य हैं।

2. ईयर बैक की स्थिति

यदि कोई छात्र प्रथम वर्ष के दोनों सेमेस्टर मिलाकर 50% से कम विषय यानी 8 में से केवल 3 या उससे कम पेपर में पास होता है, तो उसे अगले वर्ष में प्रमोट नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उसकी ईयर बैक लगेगी और उसे उसी वर्ष को दोबारा पढ़ना पड़ेगा।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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