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MBA में बैक आने पर क्या करें? कोर्स पूरा करने कितने साल का मिलता है समय

What happens if you get a back in MBA: एमबीए देश-दुनिया में हाई इनकम के लिए सबसे लोकप्रिय कोर्स है। लेकिन इस कोर्स में बैक आने पर क्या होगा, छात्रों के मन में यह सवाल अक्सर रहता है। क्या उनकी इससे डिग्री प्रभावित होगी? आइए जानते हैं विस्तार में -

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MBA में बैक आने पर क्या करें (Photo - AI)

What happens if you get a back in MBA: मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) देश-विदेश में युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय और करियर-ओरिएंटेड कोर्स में से एक माना जाता है। हाई इनकम और एक अच्छे करियर की बात आती है तो छात्र के साथ उनके अभिभावकों के मन में भी एमबीए कोर्स ही आता है। कॉरपोरेट जगत में सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए हर साल लाखों छात्र इस प्रोफेशनल डिग्री में दाखिला लेते हैं। हालांकि, केस स्टडीज, प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन और सेमेस्टर परीक्षाओं के भारी दबाव के कारण कई बार छात्रों की एक या दो विषय में बैक (Backlog) लग जाती है। ऐसे में छात्रों के मन में अपने करियर, प्लेसमेंट और डिग्री के रद्द होने को लेकर डर बैठ जाता है। क्या यह डर सही है, क्या सच में बैक आने से डिग्री रद्द हो सकती है। आइए समझते हैं कि बैक आने पर क्या कदम उठाने चाहिए और कोर्स पूरा करने के क्या नियम हैं।

एमबीए कब किया जा सकता है?

एमबीए कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र का ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने वाले छात्र मैनेजमेंट में एमबीए कोर्स के लिए जा सकते हैं।

MBA में बैक आने पर क्या करें?

एमबीए के दौराम यदि किसी सेमेस्टर परीक्षा में आपकी बैक लग जाती है, तो घबराने की बिलकुल आवश्यकता नहीं है। विश्वविद्यालय और मैनेजमेंट संस्थान छात्रों को साल बचाने के लिए और परीक्षा पास करने के लिए एक अवसर प्रदान करते हैं।

सप्लीमेंट्री या कैरी-ओवर परीक्षा की तैयारी: विश्वविद्यालय द्वारा रिजल्ट जारी होने के बाद या अगले सेमेस्टर की परीक्षाओं के साथ सप्लीमेंट्री एग्जाम यानी Backlog Exam आयोजित किए जाते हैं। संस्थान द्वारा निर्धारित बैकलाग फीस भरकर आप इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं और अपना साल बचा सकते हैं।

अगले सेमेस्टर में प्रमोशन - एमबीए में आमतौर पर 1 या 2 विषयों में बैक लगने पर छात्र का साल खराब नहीं होता। उसे 'प्रमोटेड विद बैकलाग' के तहत अगले सेमेस्टर में भेज दिया जाता है, जिससे पढ़ाई बाधित नहीं होती। साथ ही बैकलॉग पेपर की तैयारी भी कर सकते हैं।

इंटरनल असेसमेंट और प्रोजेक्ट्स की जांच - एमबीए में केवल थ्योरी के अंक ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि असाइनमेंट और प्रेजेंटेशन के अंक भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अगर बैक केवल कुछ अंकों से लगी है, तो अपने फैकल्टी से बात करके री-इवैल्यूएशन या री-चेकिंग का विकल्प चुन सकते हैं। साथ ही असाइनमेंट और प्रेजेंटेशन के नियम अक्सर आपको बैक से बचा लेते है।

पहला मौका कभी न गंवाएं - बैक लगने के बाद जैसे ही पहला सप्लीमेंट्री या री-एग्जाम का अवसर मिले, उसी में पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देकर क्लियर कर लें ताकि अंतिम वर्ष तक पेंडिंग पेपर्स का बोझ आप पर बढ़ता न जाए।

एमबीए पूरा करने के लिए अधिकतम कितना समय मिलता है?

सामान्य तौर पर नियमित एमबीए का कोर्स 2 वर्ष यानी 4 सेमेस्टर की अवधि का होता है। लेकिन किसी विषय में फेल होने या बैक लगने की स्थिति में छात्र को डिग्री पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है। इसमें कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है, जिसके आधार पर छात्र को कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है। इसका अर्थ है कि भले ही आपका कोर्स 2 साल का है लेकिन आपको इसके पूरा करने के लिए एक निर्धारित समय दिया जाता है, जिसमें बैक के पेपर पास किए जा सकते हैं। लेकिन अगर आप उस निर्धारित समय-सीमा में भी अपनी परीक्षा पास नहीं कर पाएं है तो आपकी डिग्री रद्द हो जाती है।

N+2 या N+3 वर्ष का नियम

एआईसीटीई (AICTE) और यूजीसी (UGC) से संबद्ध भारतीय विश्वविद्यालयों की गाइडलाइन के अनुसार, 2 साल के एमबीए प्रोग्राम को पूरा करने के लिए छात्रों को अधिकतम 4 से 5 वर्ष (N+2 या N+3 वर्ष) की समयावधि दी जाती है।

निर्धारित समय-सीमा की गणना

इसका अर्थ यह है कि जिस वर्ष आपने एमबीए में एडमिशन लिया है, उस वर्ष से अगले 4 या 5 वर्षों के भीतर आपको अपने सभी सेमेस्टर के पेंडिंग विषयों को पास करके क्रेडिट स्कोर पूरा करना अनिवार्य होता है।

समय-सीमा समाप्त होने का परिणाम

यदि कोई छात्र तय किए गए अधिकतम वर्षों (जैसे 4 या 5 साल) में भी अपनी सभी बैक क्लियर नहीं कर पाता, तो उसकी रजिस्ट्रेशन आईडी रद्द कर दी जाती है और उसे वह डिग्री प्रदान नहीं की जाती।

बैकलॉग का प्लेसमेंट और करियर पर असर

एमबीए का सबसे मुख्य आकर्षण कैंपस प्लेसमेंट होता है। बैक लगने की स्थिति में प्लेसमेंट पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना जरूरी है:

एक्टिव बैकलाग बनाम क्लियर बैकलॉग

अधिकांश कॉरपोरेट कंपनियां कैंपस रिक्रूटमेंट के दौरान शर्त रखती हैं कि छात्र के पास कोई 'एक्टिव बैकलॉग' (Active Backlog) नहीं होना चाहिए।

समय पर क्लियर करने का फायदा

यदि आपने प्लेसमेंट सीजन (फाइनल ईयर) शुरू होने से पहले अपने सभी बैक पेपर्स क्लियर कर लिए हैं, तो आप कंपनियों के इंटरव्यू में बैठने के लिए पूरी तरह पात्र हो जाते हैं।

रिज्यूमे पर प्रभाव

एक बार बैक क्लियर हो जाने के बाद मिलने वाली फाइनल कंसोलिडेटेड मार्कशीट और डिग्री पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, जिससे आपके कॉरपोरेट करियर पर कोई बाधा नहीं आती।

बैकलॉग और ईयर ड्रॉप से बचने के महत्वपूर्ण टिप्स

बैकलॉग और ईयर ड्रॉप से बचने के लिए छात्र को यूनिवर्सिटी के क्रेडिट सिस्टम को समझना जरूरी है। एडमिशन लेते ही समझ लें कि अगले सेमेस्टर/साल में प्रोमोट होने के लिए न्यूनतम कितने क्रेडिट या विषय पास करना अनिवार्य है। साथ ही एमबीए में इंटरनल मार्क्स काफी स्कोरिंग होते हैं। इन्हें समय पर जमा करके आप थ्योरी में बैक लगने के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अपनी नियमित कक्षाओं के साथ-साथ बैक पेपर के सिलेबस के लिए रोजाना 1 घंटे का अतिरिक्त समय निकालें।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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