क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारत में दोपहर के 12 बज रहे होते हैं, तो अमेरिका में रात क्यों होती है और जापान में शाम ढलने क्यों लगती है। हमारी पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा घूमती है और इसी घुमाव के कारण दुनिया के हर हिस्से में सूरज का समय अलग-अलग होता है। लेकिन यह कैसे तय किया जाता है कि कहा क्या समय हो रहा है और उसके अनुसार, बिजनेस, हवाई उड़ान और अंतरराष्ट्रीय संचार को व्यवस्थित कैसे किया जाता है। इस एक सुव्यवस्थित ढांचे में बांधा गया है, जिसे हम टाइम जोन के रूप में जानते हैं। तो आइए यह जानते हैं कि टाइम जोन की गणना कैसे की जाती है।
कैसे की जाती है टाइम जोन की गणना
टाइम जोन की गणना का सबसे पहला और मुख्य आधार पृथ्वी का आकार है। पृथ्वी गोल है और एक पूरे चक्कर में वह 360 डिग्री का कोण बनाती है। 360 डिग्री के इस चक्कर में 24 घंटे लगते हैं। इसके आधार पर अगर गणना की जाए तो 360 को 24 से डिवाइड करें तो आपको 15 मिलता है। इसका अर्थ यह है कि हर 15 डिग्री पर एक घंटा होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि पृथ्वी को 15 डिग्री देशान्तर (Longitude) घूमने में 1 घंटा लगता है। यही 15 डिग्री का अंतर दुनिया में 1 घंटे के समय का अंतर पैदा करता है।
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समय की शुरुआत का केंद्र क्या है?
दुनिया भर के समय को नापने के लिए एक शुरुआती बिंदु का होना जरूरी था। इसके लिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इंग्लैंड के लंदन में स्थित ग्रीनविच (Greenwich) को शून्य बिंदु माना और इसे जीरो डिग्री मना गया। यहां के समय को Greenwich Mean Time (GMT) या Coordinated Universal Time (UTC) कहा जाता है। दुनिया के सभी देशों का समय इसी स्थान से आगे या पीछे गिना जाता है।
पूर्व में 'प्लस' और पश्चिम में 'माइनस' का क्या फर्क है
चूंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर घूमती है, यही कारण है कि पूर्व के देशों में सूरज पहले उगता है और पश्चिम के देशों में बाद में। यदि आप ग्रीनविच रेखा से पूर्व दिशा की ओर जाएंगे, तो समय आगे (+) बढ़ेगा। वहीं अगर आप ग्रीनविच रेखा से पश्चिम दिशा की ओर जाएंगे, तो समय पीछे (-) चलेगा। उदाहरण के तौर पर बात करें तो ग्रीनविच यानी जीरो डिग्री से पूर्व की दिशा में हर 15 डिग्री पर 1 घंटा जुड़ेगा और वहां से 15 डिग्री पश्चिमी की दिशा में 1 घंटा घटेगा।
भारत का समय कैसे तय होता है?
भारत का आकार काफी बड़ा है, इसलिए देश के बीचों-बीच से गुजरने वाली 82.5° पूर्वी देशांतर रेखा (जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर/प्रयागराज से होकर गुजरती है) को भारत की मानक समय रेखा माना गया है। अब यदि हम भारत के समय की गणना गणितीय रूप से करें तो 1° देशान्तर = 4 मिनट का अंतर। इसकी गणना 60 मिनट÷15° के आधार पर की जाती है। भारत की रेखा = 82.5 पूर्व है, इसे अगर 4 से गुना की जाए तो 330 मिनट होता है और इसके अनुसार, कैलकुलेशन 5 घंटे 30 मिनट होता है। यही कारण है कि भारतीय मानक समय (IST), ग्रीनविच के समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे (UTC+5:30) है। जब लंदन में दोपहर के 12:00 बजते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बज रहे होते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय डेट लाइन
जब आप ग्रीनविच से चलते हुए पृथ्वी के बिल्कुल पीछे 180° देशान्तर पर पहुंचते हैं, तो वहां अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (IDL) स्थित होती है। इस रेखा को पार करते ही पूरी तारीख (Date) बदल जाती है। यदि आप पूर्व से पश्चिम की ओर इस रेखा को पार करते हैं, तो एक दिन जुड़ जाता है, और यदि पश्चिम से पूर्व की ओर पार करते हैं, तो एक दिन घट जाता है। प्राकृतिक रूप से भौगोलिक देशांतर रेखाओं के आधार पर तय हुआ यह समय चक्र ही पूरी दुनिया की घड़ियों को एक साथ और व्यवस्थित तरीके से चलाता है। इसी के आधार पर दुनिया में होने वाली गतिविधियों को व्यवस्थित किया जाता है।
