दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने देश की सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संगीन और अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। द्वारका क्राइम ब्रांच की मुस्तैदी से कनाडा भेजे जा रहे अफीम के पार्सल पकड़े गए, जिसके बाद पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक फैले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क से जुड़े चार आरोपियों -हरदीप सिंह, यादविंदर सिंह, सिमरनजीत सिंह और जीवन सिंह को धर दबोचा है।
मामले की शुरुआत मोती नगर के एक कूरियर सेंटर से हुई, जहां जांच के दौरान कनाडा जाने वाले एक पार्सल को रोका गया। देखने में पार्सल साधारण लग रहा था, लेकिन जब बारीकी से तलाशी ली गई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। खाने-पीने की चीजों के नीचे सिल्वर फॉयल का 'फॉल्स बॉटम' बनाकर करीब 3 किलो अफीम छिपाई गई थी।
इसके बाद जब कड़ियों को जोड़ा गया, तो दो और पार्सलों से भारी मात्रा में अफीम जब्त की गई। पुलिस ने कुल 5.138 किलो अफीम बरामद की है, जिसकी कनाडा के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
ड्रग्स के बदले हथियार
इस हाई-टेक नेटवर्क के काम करने का तरीका किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं था। आरोपी फर्जी KYC का इस्तेमाल करके पार्सल बुक कराते थे। एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए ये सिग्लन ऐप और कनाडाई व्हाट्सएप नंबरों का सहारा लेते थे। पैसों का लेनदेन बेनामी बैंक खातों और UPI से होता था, जबकि अफीम की डिलीवरी जीपीएस लोकेशन के जरिए 'डेड-ड्रॉप' तकनीक से ली जाती थी। भारत में करीब 1.5 लाख रुपये किलो मिलने वाली अफीम को ये कनाडा में 50 से 100 डॉलर प्रति ग्राम के हिसाब से बेचते थे।
पुलिस ने क्या बताया?
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'ड्रग्स के बदले हथियार' (Drugs for Weapons) के खेल को लेकर हुआ है। पुलिस के अनुसार, इस काली कमाई का इस्तेमाल विदेशों से हथियार खरीदने और भारत में आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियों को इस सिंडिकेट के तार खूंखार आतंकी अरशदीप सिंह उर्फ 'अर्श डल्ला' से जुड़े होने के मजबूत सबूत मिले हैं।
पाकिस्तान सीमा पार से ड्रोन के जरिए जो हथियार पंजाब में गिराए जाते थे, वे इसी नेटवर्क के जरिए गैंगस्टरों और आतंकियों तक पहुंचाए जाने थे। फिलहाल पुलिस बाकी फरार आरोपियों की तलाश और वित्तीय ट्रेल की गहन जांच में जुटी है।
