गुजरात के जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी एक बार फिर परीक्षा प्रणाली को लेकर विवादों में घिर गई है। यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आयोजित बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) थर्ड ईयर के शल्य तंत्र-1 विषय की परीक्षा में पेपर लीक होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है। विश्वविद्यालय के कार्यवाहक परीक्षा निदेशक एच. पी. झाला के अनुसार, परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित हुई थी।
व्हाट्सएप पर प्रश्न वायरल होने की जानकारी मिलने पर कुलपति से चर्चा की गई और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए। समिति वायरल प्रश्नों, मूल प्रश्नपत्र और अन्य संबंधित तथ्यों का मिलान कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
20 जुलाई को हुई थी परीक्षा
जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई को आयोजित इस परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। हालांकि उस समय इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि वायरल हुए अधिकांश प्रश्न प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली, गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों का कहना है कि यदि वायरल सामग्री और वास्तविक प्रश्नपत्र में इतनी अधिक समानता है तो पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
छात्र संगठनों का हंगामा
इस बीच युवा कांग्रेस और एनएसयूआई सहित कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे छात्रों के साथ आंदोलन भी करेंगे। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उससे संबद्ध कॉलेजों की अन्य परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
