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ऐसा लग रहा था मेरे साथ भगवान अन्याय कर रहा है... एशियन गेम्स के लिए पहुंचीं पहलवान निशा दहिया ने बताया क्या से क्या हुआ

Nisha Dahiya Interview: भारतीय महिला रेस्लर निशा दहिया जापान में शुरू होने वाले एशियन गेम्स में भारत को पदक दिलाने के लिए आश्वस्त नजर आ रही हैं, लेकिन ये सफर उनके लिए आसान नहीं रहा है। उन्होंने अब खुलकर अपनी कहानी बयां की है।

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निशा दहिया (Instagram/Nisha_Dahiya_07)

वर्षों से निशा दहिया को हर चोट के बाद यही सवाल परेशान करता था कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है। जब सब कुछ ठीक होता दिख रहा था, तभी शरीर ने क्यों साथ नहीं दिया। जिस टूर्नामेंट में उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी उसमें निराशा क्यों मिली। निशा ने अब असफलताओं को सहजता से स्वीकार करना सीख लिया है और अपने करियर में बार-बार बाधा डालने वाली चोटों के बारे में शिकायत करना बंद कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने यह सीख लिया है कि वह अपने काम पर नियंत्रण बना सकती हैं परिणाम पर नहीं।

मानसिकता में इस बदलाव के साथ जब निशा एशियाई खेलों में महिलाओं के 68 किलोग्राम वर्ग में मैट पर उतरेगी तो बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ही ध्यान देगी। निशा ने पीटीआई से कहा, "पहले मुझे लगता था कि भगवान मेरे साथ अन्याय कर रहे हैं। मैं सोचती थी, मेरे साथ बार-बार ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन अब मैं ऐसा नहीं सोचती। अब मैं समझ गई हूं कि मुझे वही मिलेगा जो मेरे भाग्य में लिखा है। मैं केवल अपने काम पर ध्यान दूंगी, कड़ी मेहनत करूंगी और अच्छी कुश्ती लडूंगी। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान दूंगी।"

निशा का करियर अक्सर उम्मीदों से भरा रहा है, लेकिन परिणाम उनके अनुरूप नहीं रहे हैं। विश्व चैंपियनशिप 2022 में लिंडा मोराइस के खिलाफ 4-0 की बढ़त बनाने के बावजूद कांस्य पदक के मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद चोटिल होने के कारण वह कई महीनों तक खेल से दूर रहीं। पेरिस ओलंपिक 2024 में निशा के पदक जीतने की पूरी संभावना दिख रही थी। क्वार्टरफाइनल में वह उत्तर कोरिया की पाक सोल गम से 8-1 से आगे थीं लेकिन उनकी उंगली में मोच आ गई और कंधे में चोट लगी जिससे वह आखिर में 8-10 से हार गई।

निशा ने कहा, "परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता है। हर कोई जीत हासिल करना चाहता है। कभी-कभी मुकाबला अनुकूल होता है तो कभी-कभी आप दबाव में आ जाते हैं। पेरिस में मैं अच्छा प्रदर्शन कर रही थी लेकिन फिर चोट लग गई। चोट किसी के नियंत्रण में नहीं होती। जब आप अच्छी तरह से अभ्यास कर रहे होते हैं, तो सब कुछ सुचारू रूप से चलता है। फिर चोट सब कुछ बिगाड़ देती है और आप अगले छह महीनों तक ठीक से अभ्यास नहीं कर पाते। आप मानसिक रूप से काफी हद तक टूट जाते हैं। मैं तब भगवान से कहती कि वह मेरे साथ ही ऐसा क्यों कर रहे हैं।" लेकिन अब उन्होंने शिकायत करना और अतीत में जीना छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा, "अगर आप अतीत में ही खोए रहेंगे तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आपको और आगे बढ़ना होगा। मुझे लॉस एंजिलिस ओलंपिक में खेलना है, मुझे पदक जीतना है। अगर मुझे वहां तक पहुंचना है, तो छोटी-छोटी चीजों को पीछे छोड़ना होगा।"

निशा का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका आक्रामक खेल और उनका आत्मविश्वास है। लेकिन डब्ल्यूएफआई द्वारा नियुक्त दो बार के ओलंपिक पदक विजेता जापानी कोच कोसेई अकाइशी के साथ काम करने से उनके कौशल में एक और आयाम जुड़ गया है।

उन्होंने कहा, "उनकी कुश्ती भारतीय कुश्ती से थोड़ी अलग है। उनके पास तेज गति और सटीक तकनीकें हैं। उनके सोचने का तरीका अलग है। उनके पास कुछ ऐसी तकनीकें हैं जो हमारे लिए नई हैं और इससे हमें बहुत मदद मिली है। निश्चित रूप से इससे मुझे बेहतर पहलवान बनने में मदद मिल रही है।"

(भाषा)

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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