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सिर्फ 1 अंक से MBBS छात्र फेल, ग्रेस मार्क्स से बच सकता है साल? हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी से पूछा सवाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट कोर्ट ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर के चांसलर से पूछा है कि क्या यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत छात्र को एक अंक बतौर ग्रेस मार्क दिया जा सकता है।

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1 अंक से फेल छात्र पहुंचा हाईकोर्ट

MBBS Student Fail: मध्य प्रदेश में एक एमबीबीएस छात्र के लिए सिर्फ एक अंक की कमी उसका पूरा साल खराब कर सकती है। छात्र ने कोर्ट को बताया कि वह एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में महज एक अंक से फेल हुआ है। ऐसे में एक नंबर के चलते उसका एक पूरा साल बर्बाद होने की आशंका है। मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा है, जहां कोर्ट ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर के चांसलर से पूछा है कि क्या यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत छात्र को एक अंक बतौर ग्रेस मार्क दिया जा सकता है।

ग्वालियर का मामला

यह मामला ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीबीएस छात्र रामनरेश कुशवाह की याचिका से संबंधित है। छात्र ने कोर्ट को बताया कि वह एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में महज एक अंक से फेल हुआ है। उसका कहना है कि वह दूसरे वर्ष की कक्षा में जा रहा है, लेकिन पहले वर्ष की परीक्षा में एक अंक कम होने के कारण आगे की परीक्षा में बैठने में परेशानी आ रही है। ऐसे में उसका एक पूरा साल बर्बाद होने की आशंका है।

छात्र ने दायर की याचिका

छात्र ने अपनी याचिका में मध्य प्रदेश यूनिवर्सिटीज कॉमन ऑर्डिनेंस नंबर 6 के क्लॉज 32 का हवाला दिया है। उसके मुताबिक, इस प्रावधान के तहत चांसलर को कुछ विशेष और पेचीदे मामलों में ग्रेस मार्क देने का अधिकार हो सकता है। कोर्ट ने इस मामले को 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई के लिए टॉप 10 मामलों में भी शामिल किया है।

चांसलर के अधिकार पर कोर्ट ने मांगा जवाब

8 सितंबर को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने एडिशनल एडवोकेट जनरल जाह्नवी पंडित को यूनिवर्सिटी के चांसलर से यह जानकारी लेने का निर्देश दिया कि क्या नियमों के तहत छात्र को एक ग्रेस मार्क दिया जा सकता है। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि क्या ऐसी स्थिति में चांसलर के पास छात्र का साल बचाने के लिए कोई अधिकार है। अब एमबीबीएस छात्र के मामले में हाईकोर्ट के रुख पर नजर है। यदि नियमों में प्रावधान पाया जाता है, तो एक अंक की कमी के कारण छात्र का साल बच सकता है।

Kuldeep Raghav
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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