20 AUGUST ka Itihas, Chaudhary Charan Singh kaun the: भारतीय राजनीति के इतिहास में चौधरी चरण सिंह का नाम ऐसे नेता के तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने अपना राजनीतिक जीवन किसानों और ग्रामीण भारत के मुद्दों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ाया। वे देश के पांचवें प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा। प्रधानमंत्री पद संभालने के सिर्फ 23 दिन बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके पीछे भारतीय राजनीति में उस समय चल रही उठापटक और समर्थन वापस लेने का फैसला बड़ी वजह था।
बायोग्राफी (Chaudhary Charan Singh Biography)
चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर गांव में हुआ था। उन्होंने लॉ की पढ़ाई की और आजादी के आंदोलन में भी हिस्सा लिया। आजादी के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया। वे मानते थे कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में किसानों की बड़ी भूमिका है। उत्तर प्रदेश में जमींदारी व्यवस्था खत्म करने और किसानों को जमीन से जुड़े अधिकार दिलाने के लिए उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे और केंद्र सरकार में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
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कैसे पहुंचे प्रधानमंत्री की कुर्सी तक?
1975 में लगे आपातकाल के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली और कई विपक्षी दल मिलकर जनता पार्टी के रूप में सत्ता में आए। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और चौधरी चरण सिंह सरकार में उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। हालांकि, जनता पार्टी के भीतर मतभेद लगातार बढ़ते गए। आखिरकार मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। इसके बाद चौधरी चरण सिंह को सरकार बनाने का मौका मिला। 28 जुलाई 1979 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उस समय उन्हें कांग्रेस (आई) यानी इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस का बाहर से समर्थन मिला हुआ था।
23 दिन बाद दे दिया इस्तीफा (Why Chaudhary Charan Singh resign 23 days after becoming PM)
प्रधानमंत्री बनने के बाद चौधरी चरण सिंह को संसद में बहुमत साबित करना था। इसके लिए 20 अगस्त 1979 को लोकसभा में विश्वास मत होना था। लेकिन विश्वास मत से ठीक पहले कांग्रेस (आई) ने उनकी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। समर्थन वापस होने के बाद चरण सिंह के पास लोकसभा में बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं बची थी। ऐसे में उन्होंने सदन में विश्वास मत का सामना करने के बजाय 20 अगस्त 1979 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
इस तरह चौधरी चरण सिंह का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल सिर्फ 23 दिन रहा। हालांकि, इस्तीफे के बाद भी वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर तब तक पद पर रहे, जब तक अगली सरकार का गठन नहीं हो गया। चौधरी चरण सिंह का प्रधानमंत्री कार्यकाल भले ही बहुत छोटा रहा, लेकिन किसानों के बीच उनकी पहचान आज भी एक बड़े किसान नेता के रूप में बनी हुई है। उनकी जयंती 23 दिसंबर को देश में किसान दिवस के रूप में मनाई जाती है।
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