केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नतीजों के बाद शुरू हुआ रिवैल्यूएशन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार सीबीएसई की चेकिंग व्यवस्था (CBSE Marking System) पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच फेमस टीचर अनुराग त्यागी ने भी सीबीएसई को सवालों के घेरे में लिया है। अनुराग त्यागी ने बोर्ड से निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग की है। छात्र और अभिभावक उनकी बयानों का समर्थन कर रहे हैं। अब उनका एक नया पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें सही जवाब पर जीरो अंक मिलने की बात की गई है।
सही उत्तर लिखने पर भी कटे नंबर
अनुराग त्यागी ने अपनी पोस्ट में सबसे बड़ा मुद्दा यह उठाया कि छात्रों ने अपनी परीक्षा में बिल्कुल सही उत्तर लिखे थे, इसके बावजूद मूल्यांकन के दौरान उनके नंबर काट लिए गए। यह स्थिति किसी भी छात्र को मानसिक रूप से तोड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जब देश के भविष्य यानी बच्चे अपनी खुद की तैयारी से ज्यादा बोर्ड के इवैल्यूएशन सिस्टम पर शक करने लगें, तो समझ जाएं कि व्यवस्था में बहुत बड़ी खराबी आ चुकी है।
जल्दबाजी में चेकिंग और तकनीकी खामियों का शिकार हुए छात्र
इस साल कॉपियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचने के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। आरोप लगाए जा रहे हैं कि डिजिटल सिस्टम में भारी लापरवाही बरती गई है। कॉपियों को बेहद जल्दबाजी में चेक किया गया, जिससे मूल्यांकन में कई त्रुटियां हुई। हालांकि सीबीएसई ने इस तरह के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। इसके अलावा, जो स्कैन कॉपियां अपलोड की गई, वह इतनी धुंधली और खराब क्वालिटी की हैं कि छात्र अपनी लिखावट ही नहीं पढ़ रहे हैं।
एक गलती और लाखों छात्रों के करियर पर संकट
अनुराग त्यागी के पोस्ट के अनुसार, बोर्ड के लिए यह सिर्फ एक 'चेकिंग की छोटी सी गलती' हो सकती है, लेकिन एक छात्र के नजरिए से यह उसके पूरे साल की कड़ी मेहनत का अंत है। चेकिंग में हुई ये लापरवाही न केवल छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ रही है, बल्कि उनके भविष्य और करियर को भी बर्बाद कर रही है। देश के लाखों छात्रों का पूरा एक एकेडमिक ईयर दांव पर लगा हुआ है।
छात्र सिर्फ न्याय मांग रहे हैं
अनुराग त्यागी ने कहा कि देश के छात्र सीबीएसई से कोई भीख या एहसान नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने साल भर पढ़ाई की है, परीक्षा की फीस भरी है और मेहनत से पेपर दिया है। वे सिर्फ एक पारदर्शी, निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक की गई री-चेकिंग की मांग कर रहे हैं। वे सिर्फ न्याय चाहते हैं।
