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CBSE 12 Result 2026: 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' से साइंस छात्रों को हुआ नुकसान, सवालों के घेरे में नई मार्किंग स्कीम

CBSE 12 Result 2026: इस बार सीबीएसई 12वीं का पास पर्सेंटेज बीते छह साल में सबसे कम रहा है। रिजल्ट सामने आने के बाद शिक्षा जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया, जिसका सीधा असर छात्रों के रिजल्ट पर दिखाई दिया।

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CBSE 12 Result 2026

CBSE 12 Result 2026: एक तरफ NEET UG पेपर लीक को लेकर छात्र तनाव में हैं, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई 12वीं के नतीजों ने छात्रों और पैरेंट्स को एक नई टेंशन में डाल दिया है। दरअसल, CBSE 12वीं के रिजल्ट को लेकर सोशल मीडिया पर एक बहस छिड गई है। 13 मई को सीबीएसई ने इंटर के नतीजे जारी किए थे। 18 लाख से ज्यादा छात्र इस परीक्षा में बैठे थे जिसमें से कुल 85.20% प्रतिशत छात्र छात्राएं इस बार पास हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि सीबीएसई का यह जो रिजल्ट है ये पिछले छह वर्षों में सबसे कम है। यानी इस बार पास पर्सेंटेज बीते छह साल में सबसे कम रहा है। रिजल्ट सामने आने के बाद शिक्षा जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया, जिसका सीधा असर छात्रों के रिजल्ट पर दिखाई दिया।

CBSE 12वीं के रिजल्ट में इस बार आई बड़ी गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या नई मार्किंग स्कीम के चलते छात्रों के नंबर कम आए। छात्र मान रहे हैं कि इस बार लागू हुई नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का असर रिजल्ट पर साफ दिखाई दिया। हालांकि शिक्षा जगत से जुडे लोगों का कहना है कि नई मार्किंग स्कीम का उद्देश्य ट्रांसपेरेंसी के साथ साथ एक दम निष्पक्ष मूल्यांकन करना था। अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में सीबीएसई 12वीं में पास प्रतिशत 88.39 फीसदी था, जबकि 2024 में यह 87.98 फीसदी और 2023 में 87.33 फीसदी दर्ज किया गया था। साल 2022 की बात करें तो छात्रों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा था। 2022 में 92.71 फीसदी छात्र पास हुए थे। सबसे शानदार रिजल्ट 2021 में आया था, जब कोविड महामारी के दौरान वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई थी और पास प्रतिशत 99.37 फीसदी तक पहुंच गया था। दरअसल, 2021 और 2022 के आंकड़ों को सामान्य परिस्थितियों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है क्योंकि उस समय महामारी के चलते परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए थे। लेकिन अब सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है।

चलिए अब जब नई मार्किंग स्क्रीम पर सवाल उठ रहे हैं तो जान लेते हैं कि कि सीबीएसई की यह नई मार्किंग स्कीम क्या है? दरअसल, CBSE 12वीं में इस साल पहली बार डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियों की जांच की गई। इस स्क्रीम में पहले कॉपियों को कंप्यूटर सिस्टम पर अपलोड किया जाता है और फिर स्कैन कर उन्हें डिजिटली चेक किया जाता है। जानकारों का कहना है कि नई प्रणाली में स्टेप मार्किंग और प्रजेंटेशन के बजाय आंसर्स की क्वालिटी पर ज्यादा फोकस किया गया। यानि छात्रों ने कितनी एक्यूरेसी यानी सटीक तरह से उत्तर लिखा है, उसे पर नंबर दिए गए। इसके अलावा CBSE ने इस बार competency-based और analytical प्रश्नों की संख्या भी बढ़ाई थी। इससे रटकर पढ़ने वाले छात्रों को भारी नुकसान हुआ।

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ी गई है और छात्र नई मार्किंग स्कीम पर सवाल उठा रहे हैं। कई छात्रों का दावा है कि उन्हें उम्मीद से 10-15% तक कम नंबर मिले हैं और उनका स्कोर खराब हो गया है। कुछ छात्रों ने OSM सिस्टम में तकनीकी खामियों की आशंका भी जताई है। हालांकि CBSE की ओर से किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया जा चुका है। X पर एक यूजर ने शिकायत करते हुए बताया कि JEE Main 2026 परीक्षा में उसने 98.58 परसेंटाइल स्कोर किया, जबकि CBSE Physics की परीक्षा में उसे सिर्फ 28 नंबर ही मिले हैं। दर्जनों छात्रों ने यह बात कही है कि नई मार्किंग स्कीम के चलते उनका स्कोर कम हुआ है। छात्रों ने यह सवाल भी उठाया है कि इस नई मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले सीबीएसई ने एग्जामिनर्स को कितनी ट्रेनिंग दी थी।

इस पूरे मामले पर हमने कई स्कूलों के प्रिंसिपल और शिक्षा विशेषज्ञों से विस्तार से बातचीत की तो उन्होंने भी इस बात को स्वीकार किया कि फिजिक्स और मैथमेटिक्स का पेपर इस बार अपेक्षाकृत काफी कठिन था। कुछ लोगों ने बहुविकल्पीय प्रश्नों की वजह से भी नंबर कम आने की बात उन्होंने कही। दरअसल, बहुविकल्पीय प्रश्नों में जवाब सही है तो पूरे नंबर मिलते हैं और जवाब गलत है नंबर जीरो हो जाते हैं। इन प्रश्नों में स्टेप मार्किंग या प्रेजेंटेशन के नंबर मिलने की गुंजाइश नहीं होती है। छात्रों के नंबर कम आने की एक वजह यह भी हो सकती है।

बहरहाल, सीबीएसई 12वीं रिजल्ट को लेकर यह वो सवाल हैं जिन पर बहस छिडी हुई है। छात्र टेंशन में हैं कि कम स्कोर से आगे बेहर कॉलेज में एडमिशन लेने के उनके सपने को कहीं ग्रहण ना लग जाए। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक सीबीएसई की ओर से कोई बयान नहीं आया है। उम्मीद है कि जब किसी व्यवस्था और प्रणाली पर इतने सवाल उठ रहे हैं तो बोर्ड की ओर से इस पर विस्तार से बातचीत की जानी चाहिए।

Kuldeep Raghav
कुलदीप राघव author

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर... और देखें

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