CBSE Class 12 Result 2026 Analysis: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। 13 मई को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इंटर के नतीजे जारी कर दिए और इसी के साथ 18 लाख से ज्यादा छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है। इस बार सीबीएसई 12वीं में 85.20% प्रतिशत छात्र छात्राएं पास हुए हैं और एक बार फिर बेटियों ने बाजी मारी है। इस बार 12वीं में कुल 18,57,517 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 17,68,968 स्टूडेंट्स को सफलता मिली है। छात्राओं का पास प्रतिशत 88.86% रहा है, जबकि 82.13% छात्र सफल हुए हैं। इस बार कुल पास प्रतिशत 85.20 फीसदी दर्ज किया गया है, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम है। रिजल्ट सामने आने के बाद शिक्षा जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाया, जिसका असर सीधे रिजल्ट पर दिखाई दिया।
बता दें कि CBSE 12वीं के रिजल्ट में इस बार आई बड़ी गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या नई मार्किंग स्कीम छात्रों के कम नंबरों की वजह बनी? कई शिक्षा विशेषज्ञ और छात्र मान रहे हैं कि इस बार लागू हुई नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी On-Screen Marking (OSM) का असर रिजल्ट पर साफ दिखाई दिया। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नई मार्किंग स्कीम का उद्देश्य अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन करना था। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों को अपेक्षाकृत उदार अंक दिए जा रहे थे, जबकि इस बार “वास्तविक प्रदर्शन” के आधार पर मूल्यांकन किया गया।
कैसे गिरता चला गया सीबीएसई 12वीं का परिणाम
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में पास प्रतिशत 88.39 फीसदी था, जबकि 2024 में यह 87.98 फीसदी और 2023 में 87.33 फीसदी दर्ज किया गया था। वहीं 2022 में छात्रों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और पास प्रतिशत 92.71 फीसदी पहुंच गया। सबसे ज्यादा रिजल्ट 2021 में रहा था, जब कोविड महामारी के दौरान वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई थी और पास प्रतिशत 99.37 फीसदी तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 और 2022 के आंकड़ों को सामान्य परिस्थितियों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि उस समय महामारी के चलते परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए थे। लेकिन 2023 के बाद से बोर्ड धीरे-धीरे पारंपरिक परीक्षा प्रणाली में लौटा और अब 2026 में पास प्रतिशत में स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है।
छात्र परेशान, आखिर कहां गए नंबर
बीते 6 साल में कैसा रहा सीबीएसई का रिजल्ट
- 2026: 85.20%
- 2025: 88.39%
- 2024: 87.98%
- 2023: 87.33%
- 2022: 92.71%
- 2021: 99.37%
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार प्रश्नपत्रों का स्तर थोड़ा अधिक विश्लेषणात्मक और कॉन्सेप्ट बेस्ड था। केवल रटकर पढ़ने वाले छात्रों को कठिनाई हुई, जबकि समझ आधारित तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को फायदा मिला। यही कारण है कि कई छात्रों ने पेपर को “लेंदी लेकिन चुनौतीपूर्ण” बताया। रिजल्ट में गिरावट का एक बड़ा कारण छात्रों पर बढ़ता प्रतियोगी दबाव भी माना जा रहा है। बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ छात्र JEE, NEET, CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी लगे रहते हैं, जिससे कई बार उनका फोकस बंट जाता है।
महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, खुर्जा (बुलंदशहर) के प्रधानाचार्य नरेंद्र मित्तल ने टाइम्स नाऊ नवभारत को बताया कि इस बार फिजिक्स और गणित का पेपर अपेक्षाकृत कठिन था। 2 साल से लगातार पेपर कंपटीशन को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं जो पहले के मुकाबले कठिन हैं। इसके अलावा MCQ यानी मल्टीपल च्वाइस प्रश्नों को पेपर्स में शामिल किया गया है जिसके चलते भी छात्रों के नंबर्स पर असर आ रहा है।
क्या नई मार्किंग स्कीम बनी CBSE 12वीं में कम नंबर की वजह?
CBSE 12वीं में पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियों की जांच की गई, जिसमें परीक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को ऑनलाइन चेक कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि नई प्रणाली में स्टेप मार्किंग और प्रजेंटेशन के बजाय सीधे उत्तर की गुणवत्ता पर ज्यादा फोकस किया गया। इसके अलावा CBSE ने इस बार competency-based और analytical questions की संख्या भी बढ़ाई थी। इससे रटकर पढ़ने वाले छात्रों को नुकसान हुआ। कई स्कूल प्रिंसिपलों ने भी माना कि Physics और Mathematics जैसे विषयों में पेपर अपेक्षा से ज्यादा कठिन थे। जब यह पेपर हुए थे तब भी इस पर काफी बहस हुई थी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी छात्रों ने कम नंबर आने को लेकर नाराजगी जताई। कई छात्रों का दावा है कि उन्हें उम्मीद से 10-15% तक कम अंक मिले। कुछ छात्रों ने OSM सिस्टम में तकनीकी खामियों की आशंका भी जताई, जैसे हल्के डायग्राम या स्टेप्स स्कैन में ठीक से दिखाई न देना। हालांकि CBSE की ओर से अभी तक किसी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। X पर एक यूजर ने शिकायत करते हुए बताया कि JEE Main 2026 परीक्षा में उसने 98.58 परसेंटाइल स्कोर किया, जबकि CBSE Physics की परीक्षा में उसे सिर्फ 28 अंक ही मिले। इस साल के नतीजों के बाद, छात्रों ने बोर्ड द्वारा इस्तेमाल की गई मूल्यांकन प्रणाली पर चिंता जताई है। उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या यह सवाल उठा रही है कि क्या OSM प्रणाली ने के चलते स्कोर कम हुआ है, खासकर भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे मुख्य विज्ञान विषयों में।
क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम एक डिजिटल मूल्यांकन तरीका है, जिसमें जांची जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की मैन्युअल जांच की जगह उनकी स्कैन की गई प्रतियों का मूल्यांकन परीक्षकों द्वारा एक कंप्यूटर-आधारित प्लेटफॉर्म पर किया जाता है। छात्र इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि OSM प्रक्रिया शुरू करने से पहले मूल्यांकनकर्ताओं को वास्तव में कितनी ट्रेनिंग दी गई थी।
क्या निकला निष्कर्ष
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कम पास प्रतिशत को केवल नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सख्त मूल्यांकन और बेहतर परीक्षा प्रणाली लंबे समय में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाती है। अब रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपनी आगे की पढ़ाई और करियर विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वहीं CBSE का यह रिजल्ट आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षा पैटर्न और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर नई बहस भी खड़ी कर सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो नई डिजिटल मार्किंग प्रणाली, सख्त मूल्यांकन और कठिन प्रश्नपत्र—इन तीनों वजहों ने मिलकर इस बार CBSE 12वीं के रिजल्ट को प्रभावित किया है।
