केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10 के छात्रों के पास होने के नियम को लेकर स्थिति साफ कर दी है। 2026-27 सत्र में भी छात्रों को किसी विषय में पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक लाना जरूरी नहीं है। दोनों हिस्सों के अंकों को जोड़कर कुल 33 प्रतिशत अंक हासिल करना ही पास होने के लिए जरूरी है। CBSE के पहले से जारी नियमों में भी कक्षा 10 के लिए यही व्यवस्था बताई गई है।
80+20 का पूरा हिसाब
कक्षा 10 के सामान्य विषयों में बोर्ड परीक्षा 80 अंकों की होती है, जबकि इंटरनल असेसमेंट के लिए 20 अंक निर्धारित होते हैं। छात्र के प्रदर्शन का आकलन इन दोनों हिस्सों को मिलाकर किया जाता है। इसका मतलब है कि किसी छात्र को बोर्ड परीक्षा में अकेले 33 प्रतिशत और इंटरनल में भी अलग से 33 प्रतिशत अंक हासिल करने की शर्त नहीं है।
हालांकि, छात्रों के लिए दोनों असेसमेंट में शामिल होना जरूरी है। जिन विषयों का पूरा मूल्यांकन इंटरनल असेसमेंट के जरिए होता है, उनके लिए संबंधित विषय के अलग नियम लागू हो सकते हैं।
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फिर क्यों हुआ था नियम बदलने का भ्रम?
2026-27 सत्र के लिए पासिंग क्राइटेरिया में बदलाव की खबर सामने आने के बाद छात्रों और शिक्षकों के बीच इसको लेकर काफी चर्चा हुई थी। प्रस्तावित व्यवस्था में थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक की बात कही गई थी। बाद में CBSE ने इस बदलाव को वापस लेते हुए मौजूदा पासिंग क्राइटेरिया जारी रखने की बात स्पष्ट की। 2026-27 के लिए प्रश्नपत्र के डिजाइन और असेसमेंट पैटर्न में भी बदलाव नहीं किया गया है।
कक्षा 12 के छात्रों का नियम अलग
कक्षा 12 में नियम अलग है। जिन विषयों में प्रैक्टिकल होता है, वहां छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं। CBSE की ओर से जारी FAQ में भी कक्षा 10 और 12 के पासिंग क्राइटेरिया के बीच यही अंतर बताया गया है।
इसलिए कक्षा 10 के 2027 बोर्ड एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्रों को फिलहाल अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
