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CBSE 12th Revaluation 2026: छात्रों को मिली धुंधली कॉपी, अपनी ही लिखावट नहीं पढ़ पा रहे छात्र

CBSE 12th Revaluation 2026: सीबीएसई ने 12वीं की स्कैन कॉपी डाउनलोड करने की सुविधा दे दी है, लेकिन यहां भी छात्रों को निराश होना पड़ा, क्योंकि कई छात्रों को धुंधली कॉपी मिल रही है। ये इतनी धुंधली है कि खुद छात्र भी अपना लिख नहीं पढ़ सकते हैं।

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CBSE 12th Revaluation 2026

CBSE 12th Revaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 12वीं के नतीजों की घोषणा के बाद ज्यादातर छात्र अपने रिजल्ट्स से निराश दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर छात्रों ने सवाल खड़े किए कि 'ऑनलाइन मार्किंग स्कीम' की वजह से रिजल्ट प्रभावित हुआ है। छात्रों को जैसे प्रदर्शन की उम्मीद थी, वैसा रिजल्ट नहीं आया। सीबीएसई क्लास 12वीं का रिजल्ट पिछले छह साल में सबसे कम (85.20%) आया है। छात्रों के अनुसार, ये आंकड़े भी इसी बात की ओर इशारा करते हैं कि रिजल्ट चेकिंग में ऑनलाइन तरीके को अपनाना सही नहीं था।

मामले को बढ़ता देख सीबीएसई ने घोषणा की कि जो छात्र अपने नंबरों से या कॉपी चेकिंग प्रोसेस से संतुष्ट नहीं हैं, वे रिवैल्यूशन की मदद ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए एक निर्धारित फीस जमा करनी होगी। इसके अलावा सीबीएसई ने यह भी सुविधा दी कि छात्र अपनी स्कैन कॉपी को डाउनलोड कर सकते हैं, और यह तय कर सकते हैं कि उन्हें किस कॉपी या सवाल को दोबारा से जांचने के लिए आवेदन करने की जरूरत है।

सीबीएसई ने जब रिवैल्यूशन लिंक को शुरू किया तो छात्र उसे एक्सेस नहीं कर पा रहे थे, कई छात्रों ने कहा कि इस लिंक पर क्लिक करने से प्रोसेस आगे नहीं बढ़ा रहा, जबकि कुछ ने कहा कि लिंक कुछ देर बाद गायब हो गया। जिन छात्रों ने काफी देर इंतजार करने के बाद कॉपी डाउनलोड करने या रिवैल्यूशन के लिए अप्लाई करने के लिए ट्राई किया, उनकी फीस या अटक गई।

इन चुनौतियों के बावजूद जब छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी को डाउनलोड किया तो यहां भी उन्हें निराश होना पड़ा क्योंकि कई छात्रों को धुंधली कॉपी मिल रही है। ये इतनी धुंधली है कि खुद छात्र भी अपना लिख नहीं पढ़ सकते हैं।

री-इवैल्यूएशन की राह में बड़ा रोड़ा

सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुसार, छात्र को यह स्पष्ट बताना होता है कि उसे किस प्रश्न संख्या के मूल्यांकन से आपत्ति है। इसके लिए प्रति प्रश्न फीस भी देनी होती है। लेकिन आंसर शीट इतनी धुंधली है कि न तो प्रश्न संख्या साफ दिखाई दे रही है, न छात्रों का उत्तर। ऐसी स्थिति में फिर एक नया सवाल पैदा हो गया कि छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए चैलेंज कैसे और किस आधार पर करें?

छात्रों और अभिभावकों ने रखी तीन बड़ी मांग

इन गड़बड़ियों को देखते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों ने बोर्ड के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं, जिसमें एक मांग साफ कॉपियां दोबारा जारी करने की है, जो धुंधली न हो और दूसरी मांग री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन की लास्ट डेट आगे बढ़ाने की है। इसके साथ ही ग्रेस मार्क्स देकर छात्रों को पास करने की मांग भी तेजी से सोशल मीडिया पर की जा रही है।

15-20 ग्रेस मार्क्स देकर मामला सुलझाने की मांग

कॉपियां की खराब स्कैनिंग और कुछ विषयों के कठिन प्रश्न पत्रों को देखते हुए अब छात्रों ने बोर्ड से एक अनोखी मांग की है। छात्रों का कहना है कि इस लचर व्यवस्था के कारण सभी का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है। बोर्ड को इस उलझन को तुरंत खत्म करते हुए प्रभावित छात्रों को 15 से 20 नंबर तक का ग्रेस मार्क देना चाहिए। इससे उन छात्रों को न्याय मिल सकेगा, जिन्हें खराब चेकिंग के कारण कम अंक मिलने का डर सता रहा है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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