भोपाल : एमपी में सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट को अंजाम दिए जाने की खबर है। यहां रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को 26 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया। इस दौरान ठगों ने उनसे लगभग 2.50 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिये। फिलहाल, मामला सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। जानकारी के मुताबिक, ठगों ने नासिक पुलिस का अफसर बनकर वीडियो कॉल किया था। आरोपियों ने सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को मनी लांड्रिंग केस में फंसा बताकर डराया। डराने के लिए ईडी के फर्जी समन भी भेजे गए, जिसके डर से उन्होंने बड़ी रकम ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते पुलिस खुलकर बात करने से बच रही। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल करने की बात कह रही है।
बिहार में RJD पार्षद को लगाया चूना
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद मोहम्मद सोहैब ने पुलिस से शिकायत की है कि साइबर जालसाजों ने धन शोधन के एक मामले से जुड़े होने के नाम पर उन्हें पटना स्थित उनके आवास पर घंटों तक ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ रखा। एक अधिकारी ने बताया कि पटना साइबर पुलिस थाने ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। शिकायत में सोहैब ने दावा किया कि आरोपियों ने उन्हें घर से बाहर निकलने या कोई सहायता मांगने पर ‘‘कानूनी कार्रवाई और जान से मारने’’ की भी धमकी दी। विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) सोहैब ने कहा कि उन्हें आठ अप्रैल को दिन में करीब साढ़े 10 बजे दो फोन नंबर से कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को साइबर क्राइम मुंबई इकाई का अधिकारी बताया।
सोहैब ने अपनी शिकायत में कहा कि फोन करने वाले ने मुझे बताया कि मैं धन शोधन के एक मामले में संलिप्त रहा हूं और मैंने मुंबई में केनरा बैंक के खाते के जरिए करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी वाले लेन-देन और अवैध ऑनलाइन गतिविधियां की हैं। उन्होंने मुझे धोखाधड़ी के मामले का ब्योरा दिया। राजद नेता ने कहा कि फोन करने वाले ने उनसे आधार नंबर, संपत्ति का विवरण और कुछ अन्य रिकॉर्ड जैसी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया। सोहैब ने पिछले सप्ताह दायर अपनी शिकायत में कहा है, ‘‘उन्होंने कोरे कागज पर मेरे हस्ताक्षर भी लिए। जालसाजों ने मुझे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। बार-बार प्रयास करने के बावजूद, सोहैब से संपर्क नहीं हो पाया।
दिल्ली में सीबीआई ने की कार्रवाई
सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 स्थानों पर छापेमारी के बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने इसे ‘ऑपरेशन चक्र-5’ करार देते हुए बताया कि सीबीआई ने राजस्थान सरकार के अनुरोध पर दर्ज ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और मुंबई में छापेमारी कर दोनों जगहों से दो-दो लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने 42 किस्तों में कुल 7.67 करोड़ रुपये की उगाही की। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों ने खुद को विभिन्न कानून लागू करने वाली एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को तीन महीने से अधिक समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में बताया, “सीबीआई ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों की जांच में बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रही है, जिसमें ऐसे अपराधों के पीछे के बुनियादी ढांचे को खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया है। सीबीआई ने हाल के महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले दर्ज किए हैं। एजेंसी ने राजस्थान मामले को अपने हाथ में लेने के बाद व्यापक डेटा विश्लेषण और ‘प्रोफाइलिंग’ से जुड़ी गहन जांच की। सीबीआई ने अपराधियों की पहचान के लिए जांच के उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान प्राप्त सुरागों के आधार पर, सीबीआई ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद व संभल, पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर, मुंबई और जयपुर में 12 स्थानों पर छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप इस बेहद संगठित अपराध गिरोह में शामिल चार व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई। एजेंसी ने छापेमारी के दौरान बैंक खाते का विवरण, डेबिट कार्ड, चेकबुक, जमा पर्चियां और डिजिटल उपकरण/साक्ष्य जब्त किए। गिरफ्तार लोगों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
