Tata Sons Succession Explained : टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी टाटा संस ने अपने नए चेयरमैन की तलाश तेज कर दी है। वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे आगे इस पद पर नहीं रहेंगे। इस वजह से कंपनी ने नया उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इनमें टी वी नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान शामिल हैं। एन चंद्रशेखरन ने साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। वे इस समय अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। उनका कार्यकाल 2027 में समाप्त हो जाएगा। इसके बाद वे इस पद पर दोबारा नहीं रहना चाहते हैं। इसलिए नए चेयरमैन की तलाश औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। हालांकि अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चयन प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है।
चयन प्रक्रिया और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका
नया चेयरमैन चुनने में टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स की मुख्य भूमिका होगी। टाटा ट्रस्ट्स के पास होल्डिंग कंपनी का नियंत्रण होता है। सूत्रों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कुछ नाम सरकार के टॉप नेतृत्व को भी बताए हैं। इन नामों पर गहराई से चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस की तरफ से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
रेस में शामिल पहला नाम: टी वी नरेंद्रन
टी वी नरेंद्रन इस समय टाटा स्टील के सीईओ और प्रबंध निदेशक हैं। वे कंपनी के अंदरूनी उम्मीदवारों में सबसे आगे माने जा रहे हैं। नरेंद्रन साल 1988 से टाटा समूह के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें टाटा समूह में काम करने का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय तक टाटा स्टील का सफलता से नेतृत्व किया है। नरेंद्रन ने टाटा स्टील को कई मुश्किल दौर से बाहर निकाला है। उन्होंने कठिन वैश्विक परिस्थितियों और यूरोपीय कारोबार की चुनौतियों का सामना मजबूती से किया है। हालांकि, उनका पूरा करियर मुख्य रूप से टाटा स्टील के आसपास ही रहा है। इस कारण उनके पास पूरी होल्डिंग कंपनी चलाने और पैसे के आवंटन का अनुभव थोड़ा कम माना जाता है। अगर वे चेयरमैन बनते हैं, तो उन्हें आईटी, ऑटोमोबाइल, विमानन और उपभोक्ता जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों को संभालना होगा।
रेस में शामिल दूसरा नाम: सौरभ अग्रवाल
सौरभ अग्रवाल टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और समूह के सीएफओ हैं। वे वित्त और रणनीति के क्षेत्र में एक मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं। वे साल 2017 में एन चंद्रशेखरन के साथ टाटा संस में शामिल हुए थे। सौरभ अग्रवाल के पास इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और पूंजी आवंटन का बहुत अच्छा अनुभव है। उनका काम केवल सीएफओ तक सीमित नहीं है। वे कंपनी के पैसों के सही उपयोग और निवेश से जुड़े बड़े फैसले लेते हैं। टाटा समूह को आने वाले समय में बहुत बड़े निवेश की जरूरत होगी। ऐसे में सौरभ अग्रवाल का वित्तीय अनुभव कंपनी के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।
रेस में शामिल तीसरा नाम: आशीष चौहान
आशीष चौहान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के एमडी और सीईओ हैं। वे इस रेस में एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाले दावेदार के रूप में उभरे हैं। वे भारत के शेयर बाजार के बड़े विशेषज्ञों में से एक हैं। उन्होंने 1990 के दशक में एनएसई को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आशीष चौहान ने आईआईटी मुंबई से पढ़ाई की है और आईआईएम कलकत्ता से प्रबंधन की डिग्री ली है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईडीबीआई बैंक और बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) में भी बड़े पदों पर काम किया है। वर्तमान में वे एनएसई के 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ की तैयारी संभाल रहे हैं। उनके पास तकनीक, वित्तीय सेवा और शेयर बाजार का गहरा अनुभव है। वे भारत के नियमों और सरकारी नीतियों को भी बहुत अच्छे से समझते हैं। अगर आशीष चौहान को चुना जाता है, तो टाटा समूह को एक बाहर का अनुभवी नेता मिलेगा। हालांकि, शेयर बाजार से निकलकर 30 से अधिक कंपनियों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले विशाल समूह को चलाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
कौन संभालेगा टाटा का साम्राज्य? (तस्वीर-AI)
चर्चा में आए कुछ अन्य नाम
मुख्य तीन दावेदारों के अलावा कुछ अन्य नाम भी चर्चा में रहे हैं। अगर चुनाव समिति समय पर फैसला नहीं ले पाती है, तो नोएल टाटा खुद अंतरिम चेयरमैन बन सकते हैं। इसके अलावा टाटा संस की मुख्य डिजिटल अधिकारी आरती सुब्रमण्यन का नाम भी चर्चा में है। टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा के नाम भी इस सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।
चयन समिति आने वाले महीनों में नए चेयरमैन की चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। नए चेयरमैन को फरवरी 2027 में एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही अपना पद संभालना होगा। फिलहाल नरेंद्रन सबसे मजबूत अंदरूनी दावेदार बने हुए हैं, अग्रवाल वित्त के क्षेत्र में मजबूत हैं और चौहान एक नए और बड़े बाहरी विकल्प के रूप में देखे जा रहे हैं।
