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'बलात्कारी' राम रहीम के 7वीं बार जेल से बाहर आने पर उठे सवाल, जानें कब-कब मिली पैरोल

Ram Rahim Parole Controversy: बलात्कारी बाबा के नाम से मशहूर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के 7वीं बार मिली पैरोल पर विवाद गहरा गया है। राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मिल गई और वो रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया है। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि रेप और हत्या के दोषी राम रहीम को कब-कब और कितने-कितने दिन की पैरोल मिल चुकी है।

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राम रहीम को लगातार पैरोल मिलने को लेकर सरकार पर सवाल उठे।

Ram Rahim News: बलात्कार और हत्या जैसे संगीन अपराध के दोषी राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। 7वीं बार ऐसा हुआ है, जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पैरोल पर बाहर आया है। इस बार राम रहीम 30 दिनों की पैरोल पर बाहर आया है। वह पैरोल के दौरान अपने बागपत स्थित आश्रम में ही रहेगा। बता दें, राज्य के पास पैरोल का अधिकार होता है। कैदी को जेल में अच्छे व्यवहार के चलते पैरोल मिलती है। बता दें, साल 2017 में अदालत ने राम रहीम को बलात्कार के लिए 20 साल और हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह कुल 6 बार जेल से बाहर आ चुका था, अब 7वीं बार वह पैरोल पर बाहर आया है।

लगातार पैरोल मिलने को लेकर सरकार पर उठे सवाल

राम रहीम को बार-बार आखिर क्यों पैरोल दी जा रही है? सरकार पर इस तरह के सवाल उठ रहे हैं। राज्य के पास पैरोल देने का अधिकार होता है, ऐसे में इसी वर्ष 21 जनवरी को भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। उस वक्त जेल से बाहर आकर राम रहीम यूी के बरनावा आश्रम में रुका था। मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कि कई संस्था और समितियों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है और बार-बार पैरोल मिलने को गलत करार दिया है। आपको बताते हैं कि राम रहीम को कब-कब और कितने-कितने दिन की पैरोल मिल चुकी है।

पहली पैरोल (24 अक्टूबर 2020)

बलात्कारी बाबा राम रहीम को सबसे पहले 24 अक्टूबर 2020 को 24 घंटे के सीक्रेट पैरोल मिली थी। ये पैरोल इतनी गुप्त थी कि हरियाणा में इसकी जानकारी महज 4 लोगों को थी। हरियाणा पुलिस की तीन कंपनियों की सुरक्षा में राम रहीम को बेहद गोपनीय तरीके से गुरुग्राम लाया गया था।

दूसरी पैरोल (21 मई 2021)

राम रहीम को दूसरी बार 48 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली थी। सुबह सवा छह बजे राम रहीम सुनारिया जेल से बाहर आया। फिर उसे गुरुग्राम में उसकी बीमार मां से मिलने के लिए लाया गया। इस दौरान गुरमीत मानेसर के एक फार्म हाउस में ठहरा था।

तीसरी पैरोल (7 फरवरी 2022 )

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को तीसरी बार 21 दिनों की पैरोल मिली थी. रिहाई के बाद गुरुग्राम के आश्रम पहुंचने पर अनुयायियों ने राम रहीम का स्वागत पुष्प वर्षा कर स्वागत किया था. इस दौरान अपने परिजनों के साथ गुरमीत राम रहीम गुरुग्राम आश्रम गया था।

चौथी पैरोल (जून 2022)

जून 2022 में हरियाणा सरकार राम रहीम पर चौथी बार मेहरबान हुई थी, इस दौरान उसे एक महीने की पैरोल मिली। राम रहीम जेल से बाहर आने के बाद बागपत स्थित अपने आश्रम में गया था।

पांचवीं पैरोल (अक्टूबर 2022)

अक्टूबर 2022 में राम रहीम के पैरोल 40 दिनों की पैरोल दी गई थी। इस बार भी राम रहीम जेत से बाहर आकर बागपत के बरनावा आश्रम पहुंचा था।

छठी पैरोल (21 जनवरी 2023)

हरियाणा सरकार ने छठी बार राम रहीम को राहत देते हुए उसकी 40 दिन की पैरोल को मंजूरी दी। इस बार राम रहीम को डेरा प्रमुख शाह सतनाम की जयंती में शामिल होने के लिए पैरोल मिली थी। राज्य सरकार ने इससे पहले हाई कोर्ट में ये हलफनामा दिया था कि राम रहीम के हार्ड क्रिमिनल नहीं है।

सातवीं पैरोल (20 जुलाई 2023)

राम रहीम को 7वीं बार 30 दिन की पैरोल 20 जुलाई 2023 को मिली। इस पैरोल के तहत जेल प्रशासन ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को सिरसा डेरे में जाने की इजाजत नहीं दी। डेरा प्रमुख को लगातार मिल रही परोल का खूब विरोध हो रहा है। बता दें, राम रहीम ने पिछले पैरोल के दौरान अपना म्यूजिक वीडियो जारी किया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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