क्राइम

कौन हैं सोनम की 'गर्लफ्रेंड्स' ! राजा मर्डर से है क्या है इनका कनेक्शन, बिलखती मां ने लगाए ये आरोप

इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। राजा रघुवंशी की मां ने सोनम और उसके परिवार के खिलाफ विश्वासघात आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनम के साथ काफी समय 2-3 लड़कियां रहती थी और इस मामले में उनकी जांच होनी चाहिए।

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2 जून को मिला था राजा रघुवंशी का शव।

नई दिल्ली: राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया मोड़ आ गया है। राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने टाइम्स नाउ नवभारत से बाचतीत में बताया है कि दो-तीन लड़कियां सोनम के बहुत करीब थी और इसे लेकर लड़कियों से सख्ती से पूछताछ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में लड़कियों की भूमिका हो सकती है जो पूछताछ के बाद ही पता चलेगा।

राजा की मां ने कहा कि दो से तीन लड़कियां थी, जो हर समय सोनम के साथ ही रहती थीं , हर जगह साथ जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम के परिवार ने विश्वासघात किया है और सोनम के परिवार पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। राजा की मां ने कहा कि दो से तीन लड़कियां जो उसके साथ ऑफिस में भी काम करती थीं और उनसे पूछताछ बिल्कुल होना चाहिए ।

सोनम पर राज की भाभी का आरोप

दूसरी तरफ राजा की भाभी वर्षा रघुवंशी ने कहा कि अब यह पता चल चुका है कि राज ही संजय वर्मा था और सोनम 2 - 2 घंटे उस नंबर पर बात करती थी। राजा की भाभी ने कहा सोनम हम सबसे और राजा से झूठ बोलती थी कि वो 10 बजे सो जाती थी, जबकि कॉल डिटेल में आया है कि वो रात 10 बजे के बाद दो-दो घंटे उस नंबर पर बात करती थी

2 जून को मिला था राजा रघुवंशी का शव

मेघालय में हनीमून मनाने गए राजा रघुवंशी की 23 मई को साजिशन की गई हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह और कुशवाह के तीन दोस्तों-विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को गिरफ्तार किया गया है।राजा रघुवंशी, मेघालय में हनीमून के दौरान 23 मई को लापता हो गए थे और उनका क्षत-विक्षत शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में दो जून को मिला था।

11 मई को हुई थी शादी

राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के वास्ते मेघालय के लिए रवाना हुए थे। मेघालय पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की विस्तार से तहकीकात कर रहा है। (भाषा इनपुट )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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