क्राइम

'जिंदगी मृत्यु से भी ज्यादा कष्टदायक' मासूम के रेपिस्ट को फांसी की सजा; कोर्ट ने कहा ऐसी मानसिकता खतरनाक

मध्य प्रदेश के इंदौर में सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के मुजरिम को फांसी की सजा सुनाई गई है। आरोपी ने साल 2024 की फरवरी में मासूम के साथ क्रूरता से दुष्कर्म कर उसके निजी अंगों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया।

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(प्रतीकात्मक फोटो)

Photo : ANI

इंदौर की एक विशेष अदालत ने सात वर्षीय लड़की से दुष्कर्म के 22 वर्षीय दोषी को शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश सविता जड़िया ने मंगल पंवार (22) को तत्कालीन भारतीय दंड विधान की धारा 376 (एबी) (12 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के दो संबद्ध प्रावधानों के तहत मृत्युदंड सुनाया। पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत ने इस घटना के कारण पीड़िता को हुई मानसिक और शारीरिक पीड़ा के मद्देनजर उसे पांच लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किए जाने का आदेश भी दिया।

प्रभारी जिला लोक अभियोजन अधिकारी संजय कुमार मीना ने बताया कि पंवार शहर के हीरा नगर थानाक्षेत्र में 27 फरवरी 2024 को अपने घर के बाहर खेल रही सात वर्षीय लड़की को पास के खाली भूखंड पर ले गया, जहां उसने उसके साथ बेहद ‘‘क्रूरता से दुष्कर्म किया जिससे उसके निजी अंगों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा। विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की से ‘‘क्रूरतापूर्ण दुष्कर्म’’ की घटना को दुर्लभ से भी दुर्लभतम प्रकरण की श्रेणी में रखते हुए मुजरिम को मृत्युदंड सुनाया।

पंवार के खिलाफ जुर्म साबित करने के लिए अदालत में अभियोजन की ओर से 22 गवाह, पीड़ित लड़की की मेडिकल रिपोर्ट और मुजरिम की डीएनए रिपोर्ट पेश की गई थी। अदालत ने रेप की पीड़िताओं के प्रति समाज के नजरिये पर चिंता जताते हुए अपने फैसले में टिप्पणी की, ‘‘अगर कोई महिला या लड़की या बच्ची दुष्कर्म के बाद जीवित रह जाती है तो उसकी जिंदगी मृत्यु से भी ज्यादा कष्टदायक हो जाती है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुजरिम ने सात वर्षीय बच्ची के साथ ‘‘क्रूरतापूर्वक’’ दुष्कर्म किया और उसके यौनांगों को गंभीर क्षति पहुंचाई जिससे वह 20 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही जहां उसकी प्लास्टिक सर्जरी की गई।अदालत ने सजा के मामले में मुजरिम के प्रति नरमी बरतने से इनकार करते हुए कहा कि उसकी मानसिकता के मद्देनजर वह भविष्य में भी ऐसा अपराध कर सकता है जिससे किसी पीड़ित व्यक्ति की जान जा सकती है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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