क्राइम

Father Stepmother Kill Daughter: बेटी का फिक्स्ड डिपॉजिट लेना चाहती थी सौतेली मां, नहीं दिए तो उतारा मौत के घाट

Father Stepmother Kill Daughter: झारखंड के रामगढ़ में बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने से इनकार करने पर पिता ने अपनी दूसरी पत्नी के साथ मिलकर बेटी की हत्या कर दी।

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पिता सौतेली मां ने की बेटी की हत्या

रामगढ़: जिले के भदानीनगर थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय लड़की की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ सामने आया है। इस मामले में मृतका के भाई ने अपने सगे पिता और सौतेली मां पर बहन की हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि मृतका के बैंक खाते में 6 लाख रुपये डिपॉजिट थे, जिस पर सौतेली मां और बाप की नजरें थी, जिसे वो दोनों निकाल लेना चाहते थे। लेकिन, लड़की को ये बात मंजूर नहीं थी। लिहाजा पैसों को लेकर मां-बाप ने दबाव बनाया, जब दाल नहीं गली तो दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं, वारदात को नया मोड़ देने और पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठी कहानी भी रच दी।

फांसी पर लटका मिला था शव

इस मामले में मृतका के भाई और ग्रामीणों ने भदानीनगर थाने में मामला दर्ज कराया और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्य गेट का घेराव किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि झारखंड के रामगढ़ जिले में एक दंपति को अपनी किशोर बेटी की कथित तौर पर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। क्योंकि उसने अपने डिपॉजिट बैंक खाते से पैसे निकाल कर देने से इनकार कर दिया था। 17 वर्षीय किशोरी 13 जनवरी को अपने कमरे में लटकी हुई पाई गई थी। उसके भाई ने भदानीनगर पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके पिता और सौतेली मां ने उसकी बहन की हत्या कर दी और उसके शव को फांसी पर लटका दिया। एसडीपीओ बीरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि पुलिस ने अपनी बेटी की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी पिता और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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