क्राइम

खूनी बिरयानी! शराब लेकर लौटे दोस्त का खाली प्लेट देख चढ़ा पारा, चटोरे यार को उतारा मौत के घाट

Chhattisgarh Crime New: पुलिस ने बताया कि जगदेव सारथी और अमरेश किराए के कमरे में रहकर पल्लेदारी का काम करते थे। 10 अगस्त की रात काम से लौटने के बाद दोनों बिरयानी लेकर आए और अमरेश शराब लेने बाहर चला गया। जब जगदेव वापस लौटा तब तक बिरयानी खत्म हो चुकी थी, जिससे उसे गुस्सा आ गया।

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बिरयानी को लेकर विवाद में दोस्त की हत्या।

Photo : iStock

Chhattisgarh Crime New: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंबिकापुर इलाके में बिरयानी खाने को लेकर हुए विवाद में एक युवक ने अपने ही दोस्त की हत्या कर दी। जानकारी के अनुसार मृतक ने अकेले ही पूरी बिरयानी खा ली थी। इस पर आरोपी युवक को इतना गुस्सा आया कि उसने अपने दोस्त जगदेव सारथी की बुरी तरह पिटाई कर दी। पिटाई के बाद जगदेव को गंभीर हालत में में रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस मामले को लेकर सूरजपुर एसपी अमोलक सिंह ढिल्लों ने बताया कि जगदेव सारथी और आरोपी शहर के नवागढ़ इलाके में किराए के कमरे में रहकर पल्लेदारी का काम करते थे। 10 अगस्त की रात काम से लौटने के बाद दोनों बिरयानी लेकर आए और अमरेश शराब लेने बाहर चला गया।

जब तक लौटा दोस्त, खत्म हो गई थी बिरयानी

पुलिस ने बताया कि जब अमरेश शराब लेने गया, इस बीच जगदेव ने अकेले ही पूरी बिरयानी खा ली। अमरेश लौटा तो बिरयानी खत्म हो चुकी थी। इससे वह नाराज हो गया और उसने जगदेव की जोरदार पिटाई कर दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अगले दिन जगदेव ने परिजनों को अपनी हालत के बारे में जानकारी दी। परिजनों ने घायल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी हालत गंभीर होने पर परिजन उसे रायपुर ले गए, जहां इलाज के दौरान 16 अगस्त को उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने दर्ज किया हत्या का मामला

एसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार जगदेव की मौत जानलेवा हमले से हुई है। पुलिस आरोपी संजय उर्फ अमरेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश कर रही थी। आरोपी मूल रूप से बतौली थाना क्षेत्र के बरमकेला का रहने वाला है। पुलिस ने रविवार (21 अक्टूबर) को मुखबिर की सूचना पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने पीड़ित की पीट-पीटकर हत्या करने की बात कबूल की। आरोपी अमरेश को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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