क्राइम

शराबबंदी वाले बिहार का सूरत-ए-हाल: जिससे होना था इलाज उसी से बनाई जा रही शराब, मर गए दर्जनों

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Dec 23, 2022, 10:30 PM IST

बिहार के छपरा में जहरीली शराब पीने से दर्जनों की मौत हो चुकी है। सरकार ने मरने वालों का आंकड़ा 38 बताया है, हालांकि विपक्ष दावा कर रहा है कि यह आकंड़ा काफी ज्यादा है। इन मौतों को लेकर नीतीश सरकार और उनकी शराबबंदी वाली नीति सवालों के घेरे में है।

Image

बिहार के छपरा में होम्योपैथिक दवा से जहरीली शराब (प्रतीकात्मक फोटो- pixabay)

बिहार के छपरा जहरीली शराब कांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। अपराधियों ने इस शराब को बनाने में होम्योपैथिक दवा का इस्तेमाल किया था। बिहार पुलिस ने शुक्रवार को यह दावा किया है। इस शराबकांड में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी।

पुलिस का खुलासा

सारण के एसपी संतोष कुमार ने खुलासा किया कि यह जहरीली शराब होम्योपैथिक दवा के मिश्रण से बनाई गई थी। इतना ही नहीं पुलिस ने होम्योपैथिक दवा की सैकड़ों बोतलें जब्त की हैं। पुलिस ने कहा कि इसी वजह से लोगों की मौत हुई है।

पांच गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में संजय महतो, शैलेंद्र राय, सोनू कुमार गिरी, अर्जुन महतो और राजेश सिंह उर्फ डॉक्टर का नाम शामिल है। राजेश सिंह उर्फ डॉ. जलालपुर थाना क्षेत्र के गांव नूरनगर का रहने वाला बताया जाता है, जो होम्योपैथिक दवा मिलाकर शराब सप्लाई कर रहा था।

कहां से आती थी दवाई

13 और 14 दिसंबर को इसुआपुर और मशरक के आसपास के क्षेत्रों में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। अब इस मामले में पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि राजेश सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से विभिन्न होम्योपैथिक दवाइयां फर्जी नाम और पते पर मंगवाकर, शराब बनाकर सप्लाई की जाती थी।

बैन है शराब

बिहार ने अप्रैल 2016 से शराब की बिक्री और खपत पर पूर्ण प्रतिबंध है। हालांकि इसके बाद भी राज्य में शराब चोरी-छुपे मिलती रही है। यहा कारण है कि शराब की कालाबाजारी और स्थानीय स्तर पर बनी नकली शराब के सेवन से होने वाली मौतों का सिलसिला जारी है।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

और पढ़ें
End of Article