रविवार का दिन राजधानी दिल्ली के लिए भारी दुख और सदमा लेकर आया। यहां दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दोपहर को एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस इमारत में छात्रों के लिए हॉस्टल डेज नाम का एक पीजी चलाया जाता था। हादसे के बाद अब तक राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। वहीं, अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। आइए जानते हैं हादसे के बाद दिल्ली में इसे लेकर क्या क्या हुआ....
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश
घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके का निरीक्षण किया और AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही इमारत के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि मौके के निरीक्षण और प्रारंभिक आकलन के आधार पर मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी भरोसा दिलाया है।
AIIMS में 10 घायल पहुंचे, चार को मृत लाया गया
AIIMS ट्रॉमा सेंटर के मुताबिक, हादसे के बाद कुल 10 मरीज अस्पताल लाए गए। इनमें चार को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीन मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। एक घायल की हाथ-पैर से जुड़ी सर्जरी की गई, जबकि मामूली चोट वाले एक मरीज को निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई।एक 19 वर्षीय युवक को शाम करीब 3:05 बजे सफदरजंग अस्पताल भी ले जाया गया, जहां उसे मामूली चोटों के कारण निगरानी में रखा गया।
मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटीं एजेंसियां
इमारत करीब दोपहर 1:30 बजे उस समय ढही, जब ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था। पुलिस के अनुसार, यह इमारत छात्रों के लिए PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), नगर निगम, CATS, सिविल डिफेंस और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। NDRF की दो टीमों में करीब 70 जवान और एक प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड शामिल है। मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर भी नीचे भेजे गए। तंग गलियों के कारण भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाने में भी दिक्कत आई। राहत अभियान में स्थानीय लोगों और छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।छात्रों और स्थानीय लोगों ने बनाई मानव श्रृंखला
रेस्क्यू एजेंसियों के पहुंचने से पहले आसपास मौजूद छात्रों और स्थानीय लोगों ने मलबा हटाना शुरू कर दिया था। लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर छोटे-छोटे मलबे के टुकड़ों को एक-दूसरे तक पहुंचाया और हाथों से प्लेट, प्लास्टिक की बोतलें, पाइप, कंक्रीट और लोहे की छड़ें हटाईं। एक छात्र ने बताया कि हादसे के बाद इलाके में मौजूद छात्र तुरंत मौके पर पहुंचे क्योंकि उनके दोस्त और जूनियर इस PG में रहते थे। भारी मलबा हटाने के लिए बाद में JCB मशीनें भी लगाई गईं, लेकिन छात्र उन हिस्सों से मलबा हटाते रहे जिन्हें मशीन से हटाना मुश्किल था।मालिक के खिलाफ FIR, गैर इरादतन हत्या समेत धाराएं
पुलिस ने PG के मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था और ग्राउंड फ्लोर पर निर्माण संबंधी गतिविधियां की जा रही थीं। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पिछले कई दिनों की बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा था और इससे इमारत की नींव कमजोर हो सकती है। यह भी आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य के दौरान एक दीवार हटाई जा रही थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 50 साल पुरानी इमारत पर उठे सवाल
MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी थी। यह एक पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी, जहां मूल अनुमति केवल G+1 निर्माण की थी, जबकि मौके पर G+4 संरचना खड़ी थी। पुलिस के अनुसार, इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास के कॉलेजों में पढ़ते थे।पड़ोस की महिला PG को भी एहतियातन खाली कराया गया
हादसे के बाद बगल में स्थित महिला PG को भी एहतियातन खाली कराया गया और इमारत को सील कर दिया गया। एमसीडी के उपायुक्त (दक्षिण) राकेश कुमार ने बताया कि ढही हुई इमारत से लगी इमारत जर्जर हालत में पाई गई, जिसके बाद नगर निगम ने उसे खाली कराकर सील कर दिया है और उसे गिरा दिया जाएगा। बगल वाली इमारत के सभी किरायेदारों को पास के सामुदायिक भवन में भेज दिया गया है।
कुमार ने बताया कि घटना के बाद मौके पर दो हाइड्रा मशीन, चार जेसीबी, करीब आधा दर्जन पिकअप ट्रक और 30-40 एमसीडी कर्मचारी तैनात किए गए थे। बेसमेंट में मरम्मत का काम चलने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मलबा अभी तक हटाया नहीं गया है और यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि क्या ऐसा कोई काम चल रहा था।
