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Sahibganj Manihari Ganga Bridge पर तेजी से हो रहा काम, जानें कब खुलेगा ट्रैफिक के लिए; प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल

साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल प्रोजेक्ट को इसी साल दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानिए इस प्रोजेक्ट की लागत, लंबाई, निर्माण की ताजा स्थिति, रूट और बिहार-झारखंड के लिए इसका महत्व क्या है।

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साहिबगंज-मनिहारी गंगा ब्रिज का काम तेजी से किया जा रहा है

Sahibganj Manihari Ganga Bridge: बिहार और झारखंड के बीच गंगा पर बन रहा साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल परियोजना अब अपने निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2026 तक ट्रैफिक के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। करीब 22 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में लगभग 6 किलोमीटर लंबा चार लेन का मुख्य गंगा पुल, मनिहारी बाइपास और एनएच-131A के एक हिस्से को चार लेन करना शामिल है। दिसंबर 2025 की सरकारी परियोजना रिपोर्ट में इसकी भौतिक प्रगति 81 फीसद बताई गई थी।

क्या है साहिबगंज-मनिहारी गंगा पुल परियोजना?

यह परियोजना झारखंड के साहिबगंज बाइपास को बिहार के कटिहार जिले में नारायणपुर क्षेत्र से जोड़ेगी। NHAI के मुताबिक लगभघ 22 किलोमीटर के इस कॉरिडोर में 6 किलोमीटर लंबा मुख्य गंगा पुल एक्स्ट्राडोज्ड तकनीक से बनाया जा रहा है। परियोजना में छोटी गंगा पर लगभग 300 मीटर लंबा ब्रिज, रेल ब्रिज, नौ छोटे पुल और नौ अंडरपास भी शामिल हैं।

इस पूरे कॉरिडोर का काम NH-133B और NH-131A से जुड़ा है। इसमें झारखंड की तरफ नया लिंक रोड, बिहार में करीब साढ़े पांच से 6 किलोमीटर का मनिहारी बाइपास और नारायणपुर के पास NH-131A के हिस्से को चौड़ा कर चार लेन का बनाना भी शामिल है।

परियोजना की लागत कितनी और कब शुरू हुआ काम?

परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साल 2016 में मंजूरी दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में इसकी आधारशिला रख दी थी। हालांकि, निर्माण का ठेका 2020 में करीब 1,900 करोड़ रुपये में दिया गया था। बाद में परियोजना की संशोधित लागत करीब 1978 करोड़ रुपये हो गई। सरकारी परियोजना निगरानी रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की डेडलाइन अक्टूबर 2024 रखी गई थी, जिसे आगे बढ़ाकर अब दिसंबर 2026 कर दिया गया है।

दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा परियोजना का काम

दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा परियोजना का काम

क्यों अहम है यह पुल परियोजना?

साहिबगंज और मनिहारी के बीच गंगा पर सीधा सड़क संपर्क नहीं होने की वजह से अभी आवागमन मुश्किल है। इन दोनों शहरों के बीच दूरी भी ज्यादा है और समय भी ज्यादा लगता है। पुल बनने के बाद साहिबगंज, कटिहार और आसपास के इलाकों के बीच ऑल-वेदर कनेक्टिविटी मजबूत हो जाएगी। NHAI के मुताबिक इससे दूरी में करीब 90 फीसद तक की कमी आ सकती है और भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर यातायात का दबाव भी कम हो जाएगा।

यह कॉरिडोर झारखंड में संथाल परगना को बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। साथ ही नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ व्यापारिक आवाजाही के लिए भी इसका रणनीतिक महत्व माना जा रहा है।

निर्माण में कैसी-कैसी चुनौतियां?

गंगा नदी में तेज बहाव, बाढ़ और मानसून के दौरान काम करने की सीमित अवधि के अलावा नदी पर इतने बड़े पुल के निर्माण की तकनीकी जटिलताओं ने परियोजना की समयसीमा को प्रभावित किया। हालांकि, NHAI का मौजूदा लक्ष्य इसे दिसंबर 2026 तक जनता के लिए खोलने का है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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