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Rajasthan में चुनाव खत्म होते ही 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' का सियासी खेल, पार्षदों के छिटकने का सता रहा डर!

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद मेयर और सभापति चुनाव से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी तेज हो गई है। अजमेर में कांग्रेस पार्षदों को कैंप में रखा गया है, जबकि जयपुर में भाजपा को बहुमत मिलने के बावजूद भी पार्षदों को रिसॉर्ट में रखा गया है।

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राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद अब रिसॉर्ट पॉलिटिक्स (AI Image)

राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अन्य बोर्ड के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आगामी 21 सितंबर को मेयर और सभापति के चुनाव होने हैं और इससे पहले भाजपा, कांग्रेस तथा निर्दलीय पार्षदों को अपने-अपने खेमे में बनाए रखने की कवायद की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हजारों नवनिर्वाचित पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में रखा गया है।

राजस्थान के कुल 309 शहरी निकायों में 10245 पार्षद पदों के लिए चुनाव हुए हैं। नतीजों के बाद कई निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में कई बोर्ड में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका काफी अहम हो गई है।

अजमेर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी

सबसे ज्यादा चर्चा अजमेर नगर निगम को लेकर है। यहां कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि भाजपा को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिली हैं। बोर्ड बनाने के लिए जरूरी 41 पार्षदों का समर्थन किसी भी पार्टी के पास नहीं है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बहुत ही अहम हो गया है।

मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को एक साथ रखने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने पार्षदों को एक सुरक्षित कैंप में रखा है और उन्हें कांग्रेस शासित कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु ले जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी की तरफ से यह कदम क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के बीच उठाया गया बताया गया है। इस बीच कांग्रेस ने पांच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा भी किया है। हालांकि, इस समर्थन का अंतिम राजनीतिक असर चुनाव के दौरान ही साफ होगा।

जयपुर में भाजपा के पास बहुमत

राजधानी जयपुर में तस्वीर अलग है। गुलाबी नगरी के 150 सदस्यीय नगर निगम में अब तक 146 वार्डों के नतीजे घोषित हुए हैं। भाजपा ने 78, कांग्रेस ने 53 और निर्दलीयों ने 15 सीटें जीती हैं। चार वार्डों में EVM से जुड़ी तकनीकी समस्या के चलते आज पुनर्मतदान कराया जा रहा है। भाजपा 76 के बहुमत आंकड़े से दो सीट पहले ही ज्यादा जीत चुकी है, जबकि चार सीटों पर रिजल्ट बाद में आएगा।

भाजपा ने पार्षद को रिसॉर्ट में रखा!

इसके बावजूद जयपुर में भी भाजपा पार्षदों की बाड़ेबंदी की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा पार्षदों को 12 सितंबर से बगरू के पास एक रिसॉर्ट में रखा गया है।

राज्य के दूसरे निकायों में भी बोर्ड गठन के लिए जोड़-तोड़ और पार्षदों को अपने साथ बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में 21 सितंबर के मेयर और सभापति चुनाव से पहले राजस्थान की स्थानीय राजनीति में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

Lakhveer Singh Shekhawat
लखवीर सिंह शेखावतauthor

पत्रकारिता में पिछले सात साल से सक्रिय हैं, वर्तमान में Times Now नवभारत में राजस्थान ब्यूरो हेड हैं। इससे पहले, ज़ी मीडिया और न्यूज़18 नेटवर्क के राजस्थान चैनल के लिए दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया है। उन्होंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी में डिग्री हासिल की है। राजस्थान से संबंधित समाचारों और ख़बरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। साथ ही देश की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को कवर करने में भी विशेषज्ञता हासिल है।

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