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पुणे में जमीन घोटाले से गरमाई राजनीति; ₹500 की स्टाम्प ड्यूटी में करोड़ों की डील, पार्थ पवार पर कसा शिकंजा

पुणे में 40 एकड़ की कीमती जमीन के विवादास्पद सौदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। करीब ₹1,800 करोड़ मूल्य की इस संपत्ति को मात्र ₹300 करोड़ में बेचे जाने और केवल ₹500 की स्टाम्प ड्यूटी चुकाने का खुलासा हुआ है। मामला उजागर होते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए और संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया।

Parth Pawar (File Photo: ANI)

पार्थ पवार (फाइल फोटो: ANI)

Pune Land Deal Controversy: पुणे में लगभग ₹1,800 करोड़ मूल्य की 40 एकड़ भूमि को मात्र ₹300 करोड़ में पार्थ पवार की कंपनी को बेचे जाने का मामला सामने आया है। इस सौदे ने तब और विवाद खड़ा कर दिया जब यह पता चला कि इस लेन-देन पर सिर्फ ₹500 की स्टाम्प ड्यूटी अदा की गई थी। मामले के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल जांच के आदेश दिए। कार्रवाई करते हुए पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले को निलंबित कर दिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी।

इससे पहले अपने बयान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले में सामने आई अनियमितताओं पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “जहां भी अनियमितताएं होंगी, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश देने के महज दो घंटे के भीतर ही पुणे के तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, खासकर इसलिए क्योंकि मामले में उपमुख्यमंत्री के बेटे का नाम भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, स्टाम्प और पंजीयन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह सौदा पूरी तरह अवैध प्रतीत हो रहा है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भूमि का विक्रय मात्र ₹500 के स्टाम्प पेपर पर दर्ज किया गया था, जिससे संपत्ति का मूल्यांकन वास्तविक कीमत की तुलना में बहुत कम बताया गया।

पुणे के उप-पंजीयक निलंबित

इस पूरे प्रकरण के बाद अब पुणे के उप-पंजीयक रवींद्र तारू को भी निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से इस भूमि लेन-देन को पंजीकृत किया, जिससे न केवल मूल भूमि मालिक बल्कि राज्य के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि यह भूमि पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित इलाकों में से एक है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह सौदा कई सरकारी नियमों और मानकों का उल्लंघन करते हुए किया गया था, जिसमें जरूरी स्वीकृतियों और मूल्यांकनों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।

संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम आंका गया

प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिला है कि इस सौदे में कर और स्टाम्प शुल्क में लाभ पाने के उद्देश्य से संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम आंका गया था। मामला सामने आने के बाद यह पूरा घटनाक्रम एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे “भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का साफ उदाहरण” बताते हुए व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस विवाद के चलते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर पारदर्शिता और जवाबदेही साबित करने का दबाव बढ़ गया है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह मामला राज्य के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है।

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अतुल सिंह
अतुल सिंह Author

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now ... और देखें

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