शहर

Nalanda University: यूं ही नहीं मैं 'नालंदा' कहलाता हूं, दुनिया को शिक्षित करता था और करता रहूंगा; पुराने अंदाज में लौटा नालंदा विश्वविद्यालय

Nalanda University: 815 साल के बाद नालंदा विश्वविद्यालय फिर से अपने पुराने अवतार में लौट आया है। पीएम मोदी नालंदा विश्वविद्यालय के कैंपस का उद्घाटन करेंगे। जानिए, नालंदा विश्वविद्यालय ने कैसे अपना परचम पूरी दुनिया में लहराया था। जानिए यहां कितने छात्र पढ़ने आते हैं और उनकी रहने की व्यवस्था कैसी होत थी।

Image

नालंदा विश्वविद्यालय।

Photo : Twitter

Nalanda University: बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय एक समय दुनिया के लिए शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। 815 साल के लंबे इंतजार के बाद यह शिक्षा का केंद्र एक बार फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है। इसके परिसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा होना है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सपनों का नालंदा विश्वविद्यालय अब साकार रूप ले रहा है।

दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास, शिक्षा के प्रति भारतीय दृष्टिकोण और इसकी समृद्धि को दर्शाता है। इसका महत्व न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए अनमोल धरोहर के रूप में है। नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शिक्षा केंद्र था। इसे दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां छात्र और शिक्षक एक ही परिसर में रहते थे।

कब हुई थी नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना?

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. में गुप्त सम्राट कुमार गुप्त प्रथम ने की थी। बाद में इसे हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला। इस विश्वविद्यालय की भव्यता का अनुमान इससे लगाइए कि इसमें 300 कमरे, 7 बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए 9 मंजिला एक विशाल पुस्तकालय था, जिसमें 3 लाख से अधिक किताबें थीं।

एक साथ 10 हजार छात्रों की रहने की व्यवस्था

यहां एक समय में 10,000 से अधिक छात्र और 2,700 से अधिक शिक्षक होते थे। छात्रों का चयन उनकी मेधा के आधार पर होता था और इनके लिए शिक्षा, रहना और खाना निःशुल्क था। इस विश्वविद्यालय में केवल भारत से ही नहीं, बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, ईरान, ग्रीस, मंगोलिया आदि देशों से भी छात्र आते थे।

अनेक विषयों की होती थी पढ़ाई

नालंदा विश्वविद्यालय में साहित्य, ज्योतिष, मनोविज्ञान, कानून, खगोलशास्त्र, विज्ञान, युद्धनीति, इतिहास, गणित, वास्तुकला, भाषाविज्ञान, अर्थशास्त्र, चिकित्सा आदि विषय पढ़ाए जाते थे। इस विश्वविद्यालय में एक 'धर्म गूंज' नाम की लाइब्रेरी थी, जिसका अर्थ 'सत्य का पर्वत' था। इसके 9 मंजिल थे और इसे तीन भागों में विभाजित किया गया था : रत्नरंजक, रत्नोदधि और रत्नसागर।

बख्तियार खिलजी ने किया था बर्बाद

1193 में बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद नालंदा विश्वविद्यालय को बर्बाद कर दिया गया था। यहां विश्वविद्यालय परिसर और खासकर इसकी लाइब्रेरी में आग लगाई गई, जिसमें पुस्तकालय की किताबें हफ्तों तक जलती रहीं।

कई महान विद्वानों ने शिक्षा की थी प्राप्त

इसी नालंदा विश्वविद्यालय में हर्षवर्धन, धर्मपाल, वसुबन्धु, धर्मकीर्ति, नागार्जुन जैसे कई महान विद्वानों ने शिक्षा प्राप्त की थी। खुदाई में नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष 1.5 लाख वर्ग फीट में मिले हैं, जो इसके विशाल और विस्तृत परिसर का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है।

नए भवन का होगा उद्घाटन

अब प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर नई नालंदा यूनिवर्सिटी बिहार के राजगीर में 25 नवंबर 2010 को स्थापित की गई। नालंदा विश्वविद्यालय के इस नए भवन के उद्घाटन से पहले यहां घूमने आए बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के सच्चे इतिहास के बारे में सबको जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस विश्वविद्यालय के सच्चे इतिहास को बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसे में इस जगह की खुदाई कराकर इसके बारे में ज्यादा जानकारी लोगों को पहुंचाना चाहिए।

Input: IANS

Devshanker Chovdhary
Devshanker Chovdhary author

<p>देवशंकर चौधरी मार्च 2024 से Timesnowhindi.com के साथ करियर को आगे बढ़ा रहे हैं और बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। टाइम्स नाउ सिटी टीम में वह इंफ्रा, डेवलपमेंट, पॉलिटिक्स और लोगों से जुड़ी स्टोरी करते हैं। हर स्टोरी में अलग एंगल निकालने पर फोकस रहता है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं।&nbsp;बीते वर्षों में टेलीविजन और डिजिटल मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इससे पहले इन्होंने दैनिक जागरण, यूनीवार्ता, एबीपी न्यूज और रोहतास पत्रिका में काम किया है। दैनिक जागरण में रियल टाइम डेस्क पर काम कर चुके हैं, जहां वर्ल्ड अफेयर्स और नेशनल बीट की खबरें करते थे। यूनीवार्ता में नेशनल और विदेश डेस्क पर काम कर चुके हैं। एबीपी न्यूज में डिजिटल टीम का हिस्सा रह चुके हैं। रोहतास पत्रिका में काम करने के दौरान कोविड काल में बिहार के कई जिलों में घूम-घूम कर काम करने का अनुभव है। ग्रेजुएशन के दौरान ही पत्रकारिता से जुड़ गए थे, जिस दौरान दैनिक अखबारों के साथ काम किया है। अकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट ऑनर्स में स्नातक और जनसंचार में स्नातकोत्तर हैं।</p>

और पढ़ें
End of Article