Noida Signature Bridge Underpass: नोएडा में रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पर्थला इलाके में ट्रैफिक की समस्या को कम करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़ी परियोजना को हरी झंडी दे दी है। जिसके तहत सिग्नेचर ब्रिज के ठीक नीचे 6 लेन का अंडरपास बनाया जाएगा। करीब 80 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से FNG कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
यह अंडरपास क्यों जरूरी है?
पर्थला गोलचक्कर नोएडा के सबसे व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट्स में से एक है। यह एक ओर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और दूसरी ओर नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। इसके अलावा एफएनजी (फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद) कॉरिडोर की वजह से यहां वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हाल यह है कि सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान पुलिसकर्मियों को ट्रैफिक संभालने के लिए वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ती है, ताकि किसी तरह ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके। आने वाले समय में एफएनजी कॉरिडोर के विस्तार के साथ वाहनों का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
इन इलाकों को मिलेगा फायदा
यह प्रस्तावित अंडरपास खासतौर पर छिजारसी से सोरखा की तरफ आने-जाने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है। इसके निर्माण के बाद वाहनों को पर्थला गोलचक्कर पर रुककर ट्रैफिक सिग्नल या पुलिस व्यवस्था का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे खासतौर पर सुबह-शाम पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम का दबाव घट सकता है।
710 मीटर लंबा होगा 6 लेन अंडरपास
नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, यह अंडरपास तकनीकी रूप से भी काफी सोच-समझकर डिजाइन किया गया है। इसकी कुल लंबाई करीब 710 मीटर होगी। इसमें दोनों दिशाओं के लिए तीन-तीन लेन होंगी। हर दिशा में करीब 110 मीटर लंबा आरसीसी बॉक्स, 20 मीटर का खुला हिस्सा और दोनों तरफ करीब 280-280 मीटर लंबे एप्रोच रोड बनाए जाएंगे।
सिग्नेचर ब्रिज के नीचे बनेगा नया ट्रैफिक कॉरिडोर
खास बात यह है कि मौजूदा सिग्नेचर ब्रिज के ऊपर से वाहनों की आवाजाही पहले की तरह जारी रहेगी। नया अंडरपास उसके नीचे बनाया जाएगा। यह ब्रिज सेक्टर-72 स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर से किसान चौक की तरफ जाने वाले लोगों के लिए भी अहम रास्ता है।
जलभराव और निर्माण को लेकर खास तैयारी
बारिश होने पर अंडरपास में पानी भर जाने की समस्या काफी आम है। लेकिन इस परियोजना में जलभराव से बचने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। अंडरपास में दो सम्पवेल और पंपिंग सिस्टम लगाने का प्रावधान रखा गया है, ताकि बारिश का पानी जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।
डायफ्राम वॉल तकनीक से होगा निर्माण
निर्माण के दौरान डायफ्राम वॉल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे खुदाई के दौरान आसपास की जमीन की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे मौजूदा सिग्नेचर ब्रिज और आसपास के ढांचों पर निर्माण का बुरा असर नहीं पड़ेगा।
डीपीआर तैयार कराएगी सलाहकार एजेंसी
परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी सलाहकार एजेंसी DMTS को दी गई है। DPR तैयार होने के बाद इसकी तकनीकी जांच IIT से करवाई जाएगी। इसके बाद जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करके निर्माण के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।
18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
नोएडा प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, करीब 1 महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अगर सब कुछ तय समय के अनुसार रहा तो इसी साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण शुरू होने के बाद परियोजना को पूरा करने में करीब 18 महीने लगेंगे। अंडरपास तैयार होने के बाद पर्थला गोलचक्कर पर ट्रैफिक का दबाव कम करने और एफएनजी कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
