Nithari Case: सुरेंद्र कोली ने आज यानी शुक्रवार 18 सितंबर को उत्तराखंड हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। दिसंबर 2006 से पहले सुरेंद्र कोली को उसके करीबी लोग ही जानते थे। फिर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सुरेंद्र कोली के नाम को सबकी जुबान पर चढ़ा दिया। मामला निठारी में बच्चों के गायब होने और उनकी हत्या से जुड़ा था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, सुरेंद्र कोली की तस्वीर किसी नरभक्षी की तरह उभरने लगी। निठारी से जुड़े मामलों में उसे फांसी की सजा भी हुई और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आरोपों से बरी भी कर दिया। चलिए जानते हैं निठारी कांड की पूरी टाइमलाइन और 2006 से 2026 तक कब क्या कुछ हुआ -
निठारी कांड का खुलासा
दिसंबर 2006 में नोएडा का निठारी इलाका अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गया। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगला नंबर D-5 के पीछे और आसपास से बच्चों के मानव अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी। इसी मामले में बंगले में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने वाले Surendra Koli का नाम सामने आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 2005 से ही बंगला नंबर D-5 में काम कर रहा था।
जांच में सुरेंद्र कोली पर कई गंभीर आरोप लगाए गए। CBI ने उसके कथित इकबालिया बयान और बरामदगी को प्रॉसिक्यूशन के अहम आधारों में शामिल किया। निठारी से जुड़े 16 मुकदमों में से 13 में उसे मौत की सजा सुनाई गई थी।
अदालतों में बदल गई पूरे निठारी केस की तस्वीर
मामला आगे बढ़ा तो सुरेंद्र कोली की सजा को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई भी चलती रही। रिंपा हलदार मामले में ट्रायल कोर्ट ने साल 2009 में कोली को हत्या, अपहरण, दुष्कर्म और सबूत मिटाने के आरोपों में दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2011 में उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखा। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। अदालत ने प्रॉसिक्यूशन के सबूतों, कथित स्वीकारोक्ति और बरामदगी की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए। कोर्ट के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि D-5 की जांच में ऐसे पर्याप्त फोरेंसिक सबूत नहीं मिले, जो प्रॉसिक्यूशन की पूरी कहानी की स्वतंत्र पुष्टि कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में कोली को बरी कर दिया
मामले का अंतिम बड़ा मोड़ 11 नवंबर 2025 को आया। सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय पीठ में उस समय आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार कर ली। कोर्ट ने साल 2011 के अपने पुराने फैसले को वापस लेते हुए कोली को IPC की धारा 302, 364, 376 और 201 के आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने निठारी केस की जांच प्रक्रिया में भी कई बड़ी कमियों का जिक्र किया। फैसले में अहम गवाहों की पर्याप्त जांच नहीं होने और ऑर्गन-ट्रेड के एंगल की गहराई से पड़ताल न किए जाने का भी जिक्र है।
लगभग 18 साल जेल में रहा सुरेंद्र कोली
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अगले ही दिन यानी 12 नवंबर 2025 को सुरेंद्र कोली नोएडा की लुक्सर जेल से बाहर आया। इस तरह निठारी मामले में उसके खिलाफ लंबित आखिरी आपराधिक मामला भी खत्म हो गया। वह इस मामले में लगभग 18 साल तक जेल में रहा। इस दौरान उसे हमेशा एक खूंखार नरभक्षी की तरह देखा गया। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बावजूद भी कोली का जीवन आसान नहीं रहा। वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में एक खोखा किराए पर लेकर चाय की दुकान चला रहा था।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि जिस व्यक्ति को कभी निठारी कांड के मामलों में दोषी ठहराकर मौत की सजा दी गई थी, वही व्यक्ति बाद की न्यायिक प्रक्रिया में सभी संबंधित मामलों में बा-इज्जत बरी हो गया।
