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पंचकूला आत्महत्या केस : 5 मिनट में मैं भी मर जाऊंगा, किसको बताई थी सुसाइड की वजह

हरियाणा के पंचकुला में सात लोगों की सामूहिक खुदकुशी को लेकर नया खुलासा हुआ है। चश्मदीद के मुताबिक कर्ज होने की वजह से परिवार के सभी लोगों ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया।

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चश्मदीद के मुताबिक कर्ज होने की वजह से परिवार के सभी लोगों ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया।

पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला स्थित सेक्टर-27 में सात लोगों के शव मिलने पर आत्महत्या की आशंका जताई गई थी। अब इस मामले में चश्मदीद पुनीत राणा के बयान ने इस आशंका को सच में तब्दील कर दिया है। चश्मदीद के अनुसार, कर्ज होने की वजह से परिवार के सभी लोगों ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान चश्मदीद पुनीत राणा ने बताया कि मेरे घर के पास एक गाड़ी खड़ी थी जिस पर टावर लगे हुए थे। जब हम कार के पास आए और अंदर झांककर देखा तो कुछ लोग गाड़ी के अंदर लेटे हुए थे। हमने उनसे पूछा कि वे वहां क्यों लेटे हुए हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें कोई होटल नहीं मिल रहा है। इस पर मैंने उनसे कहा कि वे गाड़ी वहां से हटा दें, या फिर दूसरी जगह पार्क करें।"

उसने आगे कहा कि इस दौरान मैंने देखा कि गाड़ी के अंदर सभी एक-दूसरे पर गिरे हुए थे। मैंने अपना टॉर्च और फोन चालू किया और देखा कि सभी ने एक-दूसरे पर उल्टी कर रखी थी। कार के अंदर से बहुत तेज बदबू आने पर मैंने प्रवीण मित्तल से पूछा और बाहर आने के लिए कहा। गाड़ी से बाहर आने के बाद मैंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब वह गाड़ी से बाहर निकला और संतुलन खोने के बाद नीचे गिर गया। उसने मुझसे कहा कि 5 मिनट में, मैं भी मर जाऊंगा। मेरे ऊपर कर्जा बहुत ज्यादा हो गया था। रिश्तेदारों ने भी मदद करने से इंकार कर दिया। इसीलिए, हम सभी ने जहर खा लिया है। चश्मदीद के अनुसार, इतना कहने के बाद वह भी मर गया। हालांकि, उसे अस्पताल ले जाया गया था। लेकिन, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।"

मृतक की पहचान देहरादून के प्रवीण मित्तल के रूप में हुई है। वह अपने माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों के साथ एक धार्मिक आयोजन के लिए पंचकूला आया था। मृतक प्रवीण मित्तल के ससुर ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता। मुझे यह भी नहीं पता कि वह कब आया और कब चला गया। हमसे जितनी मदद हो सकती थी हमने की। वह ब्याज पर पैसे उठाता था। देहरादून में गाड़ी चलाने का काम करता था। मृतक की साली ने बताया कि वह पहले पंचकुला में ही रहते थे। लेकिन, कई वर्षों पहले देहरादून शिफ्ट हो गए थे। (इनपुट- IANS)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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