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Monsoon Rain : नदियां उफान पर, सड़कें बनीं तालाब...भारी बारिश-बाढ़ से देश बेहाल; अगले दो दिन रेड अलर्ट

North India Floods : उत्तर भारत में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दिल्ली-एनसीआर में जलभराव से उड़ानें और यातायात प्रभावित हुए। यूपी के 26 जिलों में 3.5 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, वहीं बिहार में नदियां उफान पर हैं। हिमाचल में 102 सड़कें बंद हैं, जबकि राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मूसलाधार बारिश जारी है।

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उत्तर भारत में भारी बारिश-बाढ़ का कहर

North India Floods : उत्तर भारत में मानसून के उग्र रूप ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार में हुई भारी बारिश से कई शहर पानी-पानी हो गए। दिल्ली में आईजीआई एयरपोर्ट के पास जलभराव से उड़ानें प्रभावित हुईं, वहीं गुरुग्राम की सड़कें तालाब बन गईं। यूपी के 26 जिलों में बाढ़ से 3.50 लाख से अधिक आबादी प्रभावित है और वाराणसी व बलिया में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उधर, बिहार के 5 जिलों में नेपाल व झारखंड में हुई बारिश के चलते बाढ़ का तांडव जारी है। हिमाचल में भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बाद 102 सड़कें ठप्प हैं, जबकि राजस्थान के खंडार में 130 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है।

हिमाचल प्रदेश में बारिश से आफत

हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण कुल 87 सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच, शिमला स्थित मौसम विभाग ने शुक्रवार को येलो अलर्ट जारी करते हुए शनिवार को कांगड़ा और सिरमौर जिलों के कुछ अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी।अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहा। सिरमौर जिले के नाहन में बृहस्पतिवार शाम से 67.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद जोगिंदरनगर में 57 मिलीमीटर, नादौन में 52.6 मिलीमीटर जबकि जटोन बैराज और भरवाईं में 40-40 मिलीमीटर बारिश हुई। धर्मशाला में 34.4 मिलीमीटर, नैना देवी में 34.2 मिलीमीटर, कटौला में 26.1 मिलीमीटर और नेरी में 20 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग ने बताया कि कांगड़ा और सुंदरनगर में गरज के साथ बारिश हुई और आकाशीय बिजली भी चमकी। विभाग ने राज्य में 10 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, बंद हुई 87 सड़कों में सबसे अधिक 37 सड़कें मंडी जिले में बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 22, कांगड़ा में आठ, चंबा में पांच, सिरमौर और ऊना में चार-चार, शिमला में तीन, सोलन में दो तथा लाहौल-स्पीति और बिलासपुर में एक-एक सड़क बंद है। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून की शुरुआत के बाद से राज्यभर में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 108 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि राज्य को 1,237 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

हरियाणा और पंजाब में कैसा है मौसम

केंद्रशासित चंडीगढ़ के साथ ही हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में शुक्रवार को झमाझम बारिश हुई। चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम है। हरियाणा में अंबाला, नारनौल, पंचकूला, करनाल और यमुनानगर समेत कई स्थानों पर भी बारिश हुई। अंबाला में अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि करनाल में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। भिवानी में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि रोहतक में अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस रहा। पंजाब में अमृतसर, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, पठानकोट, श्री आनंदपुर साहिब, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर और रूपनगर समेत कई स्थानों पर बारिश हुई। अमृतसर में अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लुधियाना में अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस रहा। पटियाला में अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

राजस्थान में भारी का अलर्ट

राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में पिछले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश हुई। इस दौरान सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे अधिक 130 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, इस अवधि में अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं, पश्चिमी राजस्थान में अधिकांश स्थानों पर मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा।

मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। वर्तमान में एक स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना हुआ है। वहीं, मानसून की अक्षीय रेखा श्रीगंगानगर और निम्न दबाव वाले क्षेत्र से होकर गुजर रही है।

विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को भरतपुर, जयपुर, अजमेर और कोटा संभागों तथा शेखावाटी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। कोटा संभाग में कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। शनिवार को भरतपुर और कोटा संभागों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि एक-दो स्थानों पर अति भारी बारिश होने की भी संभावना है। जयपुर, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभागों के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने कहा कि छह-सात सितंबर से भारी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है, हालांकि भरतपुर, जयपुर और कोटा संभागों के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। विभाग के अनुसार, आठ सितंबर से राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में और कमी आने की संभावना है।

बिहार में बाढ़

नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य झारखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण बिहार में कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे राज्य के पांच जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा नदियों के जलस्तर में वृद्धि से कई इलाकों में पानी भर गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, भोजपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के कई निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति देखी गई।

डब्ल्यूआरडी के बुलेटिन के अनुसार, शुक्रवार सुबह छह बजे तक पटना में गंगा नदी दीघा घाट, गांधीघाट, हथीदह और मनेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। इसके अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर, कहलगांव और अन्य स्थानों पर भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर है। इसी प्रकार पटना के श्रीपालपुर और पुनपुन क्षेत्र में पुनपुन नदी तथा सिवान के दरौली में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर

उत्तर प्रदेश सरकार के बाढ़ प्रभावित 26 जिलों से 17,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है और बाढ़ से अब तक किसी भी व्यक्ति या मवेशी की जान जाने की खबर नहीं है। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, बाढ़ से करीब 3.53 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, कम से कम 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है, जबकि 4,847 लोग वर्तमान में राहत आश्रयों में रह रहे हैं। सरकार ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि राज्य भर में कुल 1,312 बाढ़ आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं, जबकि 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नावें और मोटर बोट और 1,068 मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।

बाढ़ प्रभावित जिलों में अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, ग़ाज़ीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं। बयान के मुताबिक चित्रकूट में, मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर पर पहुंच गया था जो अब घटकर 128 मीटर हो गया है लेकिन अधिकारी स्थिति और राहत कार्यों पर नजर रख रहे हैं। चित्रकूट में कम से कम 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 36 प्रभावित गांवों के 13,906 लोगों को सहायता दी गई है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 28,803 लंच पैकेट और 2,065 राहत किट बांटी हैं। अठारह बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय हैं, जबकि एम्बुलेंस और दवाओं से सुसज्जित 28 चिकित्सा टीमें तैनात की गई हैं।गाजीपुर में, पुलिस और प्रशासन ने गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण डुहिया सरैया के पास फंसे 12 चरवाहों और 2,000 से अधिक भेड़ों को बचाया।

बलिया में गंगा और घाघरा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे 48 गांव प्रभावित हुए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जिले के कुछ हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर भी दबाव बढ़ गया है, जबकि हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। महोबा में, जलस्तर बढ़ने के कारण उर्मिल और क्योलारी बांधों से लगभग 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी छोड़े जाने से महोबा के नौ और पड़ोसी जिले झांसी के छह गांवों पर असर पड़ सकता है।

उत्तराखंड में बड़ा अलर्ट

उत्तराखंड के अनेक स्थानों में शुक्रवार को भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहा जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ और सड़क मार्ग बाधित हो गए।एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि राज्य में बदरीनाथ-ऋषिकेश मार्ग सहित अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए खुले रहे।राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की रिपोर्ट के अनुसार, भूस्खलन के कारण पौड़ी-देवप्रयाग, गोपेश्वर-चोपता सहित कई सड़क मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ।बाधित मार्गों को खोलने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। अलकनंदा, मंदाकिनी और गंगा समेत अधिकांश नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से करीब एक से दो मीटर नीचे बह रही हैं।

इस बीच, देहरादून मौसम केंद्र ने शनिवार को उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की आशंका के साथ ’येलो अलर्ट’ जारी किया है। विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।मौसम केंद्र ने राज्य के सभी जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने तथा तेज से बहुत तेज बारिश होने की संभावना जतायी है। भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए हरिद्वार जिले में कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जिले में स्थित सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को पांच सितंबर को बंद रखे जाने के आदेश जारी कर दिए हैं । मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में शनिवार यानी पांच सितंबर को अवकाश घोषित किया गया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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