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Aarti Kunj Bihari Ki, Janmashtami 2026 Laddu Gopal Ki Aarti: जन्माष्टमी 2026 पर पढ़ें लड्डू गोपाल की आरती, यहां देखें आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स

Aarti kunj Bihari Ki (आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स) Janmashtami 2026 Par Laddu Gopal Ki Aarti: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लड्डू गोपाल की आरती करना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां पढ़ें आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स इन हिंदी।

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आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स, Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics

Aarti kunj Bihari Ki (आरती कुंजबिहारी की) Janmashtami 2026 Par Laddu Gopal Ki Aarti: आज जन्माष्टमी है और इस खास मौके पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ उनकी आरती करने की भी परंपरा है। कई घरों में जन्माष्टमी की पूजा के दौरान ‘आरती कुंज बिहारी की’ गाई जाती है। भगवान कृष्ण को लड्डू गोपाल, कान्हा और कुंज बिहारी जैसे कई नामों से भक्त पुकारते हैं।

जन्माष्टमी के दिन घर के मंदिर में लड्डू गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, उनका श्रृंगार किया जाता है और भोग लगाया जाता है। इसके बाद आरती करके परिवार के लोग भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। अगर आप भी जन्माष्टमी 2026 पर लड्डू गोपाल की पूजा करने वाले हैं और आरती के बोल ढूंढ रहे हैं, तो यहां पढ़ें आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स इन हिंदी, कृष्ण जन्माष्टमी आरती लिखित में।

    आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स, Aarti kunj bihari ki lyrics

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    गले में बैजंती माला,

    बजावै मुरली मधुर बाला ।

    श्रवण में कुण्डल झलकाला,

    नंद के आनंद नंदलाला ।

    गगन सम अंग कांति काली,

    राधिका चमक रही आली ।

    लतन में ठाढ़े बनमाली

    भ्रमर सी अलक,

    कस्तूरी तिलक,

    चंद्र सी झलक,

    ललित छवि श्यामा प्यारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    कनकमय मोर मुकुट बिलसै,

    देवता दरसन को तरसैं ।

    गगन सों सुमन रासि बरसै ।

    बजे मुरचंग,

    मधुर मिरदंग,

    ग्वालिन संग,

    अतुल रति गोप कुमारी की,

    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    जहां ते प्रकट भई गंगा,

    सकल मन हारिणि श्री गंगा ।

    स्मरन ते होत मोह भंगा

    बसी शिव सीस,

    जटा के बीच,

    हरै अघ कीच,

    चरन छवि श्रीबनवारी की,

    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    चमकती उज्ज्वल तट रेनू,

    बज रही वृंदावन बेनू ।

    चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू

    हंसत मृदु मंद,

    चांदनी चंद,

    कटत भव फंद,

    टेर सुन दीन दुखारी की,

    श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    आरती कुंजबिहारी की,

    श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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