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MP News: धार भोजशाला का बदला इतिहास, वाग्देवी की आरती में उमड़े श्रद्धालु; सुरक्षा के खास इंतजाम

MP Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद आज पहले शुक्रवार को धार की भोजशाला में नमाज नहीं पढ़ी गई और 721 साल बाद हिंदुओं ने मां सरस्वती की आरती की।

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कड़ी सुरक्षा के बीच गूंजे मां वाग्देवी के जयकारे (स्क्रीनग्रैब: ANI)

Photo : ANI

MP Bhojshala News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में आज शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दिन रहा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा 15 मई 2026 को सुनाए गए फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार है। सालों पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए आज के दिन परिसर में पढ़ी जाने वाली जुमे की नमाज पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वहीं दूसरी तरफ, करीब 721 साल के लंबे कालखंड के बाद पहली बार शुक्रवार के दिन हिंदू श्रद्धालुओं को परिसर में निर्बाध प्रवेश मिला, जहां सुबह से ही मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) की आरती और विशेष पूजन हुआ।

721 साल पुराना नियम बदला

भोजशाला परिसर में शुक्रवार सुबह से ही बेहद ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिले। वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तय की गई व्यवस्था, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पूजा करते थे और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे, इसको हाई कोर्ट ने पूरी तरह रद्द कर दिया है। अब तक भोजशाला के मुख्य द्वार पर एक बोर्ड लगा था, जिस पर साफ लिखा था "शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है"। शुक्रवार सुबह प्रशासन और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने इस लाइन पर स्याही पोत कर इसे मिटा दिया। गर्भगृह को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। हिंदू पक्ष के लोग मां सरस्वती की प्रतीकात्मक प्रतिमा लेकर गर्भगृह पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा और आरती शुरू की। फिलहाल यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की इंदौर खंडपीठ ने अपने 242 पन्नों के विस्तृत आदेश में एएसआई (ASI) की 2,000 से अधिक पन्नों की वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे रिपोर्ट को सही माना। कोर्ट ने स्पष्ट कहा पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों से यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध होता है कि यह परिसर राजा भोज द्वारा निर्मित मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र था, जिसे बाद में नुकसान पहुंचाया गया। हिंदुओं का यहां सदियों से लगातार पूजा करने का अधिकार रहा है, जो कभी समाप्त नहीं हुआ। इसलिए, साल 2003 का वह आदेश रद्द किया जाता है जो यहां नमाज की इजाजत देता था। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष (कमल मौला मस्जिद प्रबंधन) को राहत देते हुए कहा कि वे चाहें तो मस्जिद निर्माण के लिए धार जिले में ही राज्य सरकार से किसी दूसरी वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकते हैं। इसके साथ ही लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूल मूर्ति को वापस भारत लाने के लिए भी केंद्र सरकार को विचार करने को कहा गया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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