Rishikesh Karnaprayag Rail Project: उत्तराखंड में जब भी ट्रेन की बात होती है तो हर कोई यह कहता है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी ट्रेन पहाड़ नहीं चढ़ पाई। पहाड़ों की तलहटी तक ट्रेन की सेवाएं उपलब्ध हैं, फिर चाहे वह टनकपुर हो या हल्द्वानी, रामनगर, कोटद्वार, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की या फिर देहरादून इन सभी शहरों तक भारतीय रेलवे की सेवाएं हैं। लेकिन इन शहरों से आगे पहाड़ों की तरफ आज तक ट्रेन नहीं पहुंची है। हालांकि, अब ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के लिए नई लाइन बन रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले एक-दो साल में इस रूट पर ट्रेनें चलने लगेंगी। लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों में ट्रेन पहुंचने से पहले ही रेलवे ने एक बड़ा इतिहास रच दिया है। चलिए जानते हैं -
उत्तराखंड में बनी साढ़े 14 किमी लंबी टनल
भारतीय रेलवे ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाकर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता दिखाई है। अब उत्तराखंड में भी एक बड़ा कारनामा करके अपनी क्षमता साबित कर दी। उत्तराखंड के पहाड़ों में बन रही महत्वकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना पर भारतीय रेलवे के इंजीनियरों ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। परियोजना के तहत कई रेलवे टनल (Rail Tunnel) बनाई जा रही हैं। यहां देवप्रयाग और जनासू के बीच बनाई गई टनल नंबर 8 अब आधिकारिक तौर पर भारत की सबसे लंबी रेलवे टनल बन गई है। यह टनल लगभग 14.58 किमी लंबी है। यह टनल न सिर्फ इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है, बल्कि भविष्य में चारधाम यात्रा के लिए लाइफलाइन भी साबित होगी।
वादियों का सफर और 15 मिनट टनल के अंदर
उत्तराखंड के पहाड़ों में ट्रेन के सफर की बात सोचकर ही मन रोमांच से भर आता है। हरे-भरे और ऊंचे पहाड़, गहरी खाईयां और उनके बीच से गुजरती, कल-कल करती नदियां और उनके बीच ट्रेन का सुहाना सफर। उत्तराखंड की वादियों में ट्रेन के सुहाने सफर का सपना जल्द ही पूरा होने वाला है। इस सफर के दौरान देवप्रयाग के पास बनी यह टनल नंबर 8 अलग ही रोमांच देगी। क्योंकि वादियों के सफर के बीच आपके लगभग 15 मिनट इसी टनल में गुजरेंगे। क्यों सोचकर ही मन रोमांच से भर गया ना! अब तो बस इस रेलवे लाइन के बनकर जनता को समर्पित किए जाने का ही इंतजार है।
125 किमी लंबा है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग
बता दें कि निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग करीब 125 किमी का होगा। इसे उत्तराखंड की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह परियोजना लगभघ 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है। और उम्मदी है कि साल 2028 तक इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने पर उत्तराखंड का ऊंचा पहाड़ी इलाका भारतीय रेलवे के बड़े नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
परियोजना की अहम कड़ी है सबसे लंबी सुरंग
टनल नंबर-8 पूरी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना की सबसे अहम कड़ी है। यहां पर सुरंग बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यहां के स्थिर चट्टानों में तेजी से और सटीक तरीके खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया, जबकि कमजोर और जटिल भू-भूग में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक का प्रयोग किया गया है। भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग में डबल लाइन ट्रैक के साथ ही आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, वेंटिलेशन शाफ्ट और इमरजेंसी एस्केप पैसेज जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
चारधाम यात्रा को बनाएगी आसान
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग का सबसे ज्यादा फायदा चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को होगा। इस रेल लाइन के बन जाने के बाद पहाड़ों की घुमावदार सड़कों की बजाय तीर्थ यात्री सीधे कर्णप्रयाग तक पहुंच जाएंगे। इससे उन्हें बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के सात ही देवभूमि उत्तराखंड के अन्य तीर्थ व पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में आसानी होगी। इस रेलवे लाइन के बन जाने से पहाड़ी इलाकों में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के साधन बढ़ेंगे और पर्यटन उद्योग भी बढ़ेगा।
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