लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के खुलने का लंबे समय तक इंतजार किया गया। कई तारीखें मिलने के बाद कहीं जाकर उद्घाटन हुआ। लेकिन उद्घाटन के 21वें दिन उसके निर्माण की पोल तब खुल गई, जब उसके कई हिस्से बारिश के कारण धंस गए। अब खराब निर्माण गुणवत्ता और मेंटेनेंस में लापरवाही को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एक्सप्रेसवे की पूरी मरम्मत होने तक वहां टोल वसूली पूरी तरह से बंद कर दी गई है, और इस दौरान होने वाले टोल राजस्व की भरपाई संबंधित रियायतग्राही (कंसेंशनेयर) से ही की जाएगी।
NHAI की इस कार्रवाई के तहत निर्माण एजेंसी PNC इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर (अक्षम) घोषित करने का नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, कंपनी को भविष्य की NHAI परियोजनाओं की निविदाओं (टेंडर) से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और उसकी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर 2% तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। एजेंसी को अपने खर्च पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित हिस्से की पूरी मरम्मत करनी होगी।
इंजीनियरों पर भी गाज गिरी
इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी गाज गिरी है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारियों को हटाकर उन पर दो साल का डिबारमेंट (प्रतिबंध) लगा दिया गया है। इसके अलावा, इस परियोजना से जुड़े वर्तमान और पूर्व परियोजना निदेशकों (Project Directors) पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है। गुणवत्ता की निगरानी के जिम्मेदार स्वतंत्र अभियंता, थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज को भी डिबारमेंट का नोटिस जारी किया गया है।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच के लिए आईआईटी (IIT) खड़गपुर के विशेषज्ञों की एक टीम को नियुक्त किया गया है, जो तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी। इसके साथ ही, आधुनिक लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक के जरिए पूरे एक्सप्रेसवे की सड़क की गुणवत्ता की दोबारा जांच की जाएगी।
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की खासियत
2022 में शुरू हुई कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे परियोजना लखनऊ के शहीद पथ से शुरू होकर उन्नाव के आजाद चौराहे पर खत्म होती है। फिलहाल, इसे 6 लेन में तैयार किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में वाहनों के बोझ को देखते हुए इसको विस्तार देकर 8 लेन का भी किया जा सकता है। एनएचएआई के हवाले से एक्सप्रेसवे के काम को दो पैकेज में किया जा रहा है। इसका पहला पैकेज 18 किलोमीटर जो लखनऊ में है और दूसरा 45 किलोमीटर लंबा पैकेज उन्नाव जिले के हिस्से में है। इस परियोजना में लखनऊ जिले के 11 शहर और उन्नाव जिले के 31 गांव शामिल हैं। परियोजना की लागत- 4700 करोड़ रुपये है।
एक्सप्रेसवे पर लखनऊ के अलावा उन्नाव के आजाद चौराहे पर एंट्री-एग्जिट मिलती। उधर, लालगंज (रायबरेली)-उन्नाव रोड से भी लोग एक्सप्रेसवे पर आ जा सकेंगे। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर टॉल प्लाजा पर प्रशासनिक भवन इमारतें बनेंगी। यहां यात्रियों की सुविधाओं के लिए रेस्टोरेंट और शौचालय इत्यादि की व्यवस्था की होगी। एनएचएआई के दावे के मुताबिक, एक्सप्रेसवे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। ऐसे में दोनों शहरों के बीच 63 किलोमीटर के सफर को तय करने में 35 मिनट ही लगेंगे।
