सीबीआई ने हाल ही में दोषसिद्ध ठहराए गए अपने वरिष्ठ अधिकारी रमनीश गीर का तबादला कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कुछ महीने पहले ही दिल्ली की एक अदालत ने रमनिश गीर को एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया था। हालांकि उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर रखी है,लेकिन सत्र न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। फिलहाल केवल सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक दी गई है।
30 जुलाई को जारी आदेश के मुताबिक, CBI निदेशक की मंजूरी से उन्हें संयुक्त निदेशक एवं हेड ऑफ ज़ोन, उत्तर-पूर्व क्षेत्र (गुवाहाटी) के पद से हटाकर नई दिल्ली स्थित सीबीटी के TAFSU/System डिवीजन में संयुक्त निदेशक (तकनीकी) नियुक्त किया गया है। यह डिवीजन डिजिटल साक्ष्यों, साइबर और तकनीकी सहायता से जुड़े कार्यों को संभालता है तथा इसके पास प्रत्यक्ष जांच संबंधी अधिकार नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
18 अप्रैल 2026 को तीस हजारी स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-02 (पश्चिम जिला) की अदालत ने रमनीश गीर और उनके सह-आरोपी विनोद कुमार पांडे, जो उस समय जांच अधिकारी थे, को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (मारपीट), 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), 448 (गैरकानूनी प्रवेश) तथा धारा 34 (समान आशय) के तहत दोषी ठहराया था।
इसके बाद 28 अप्रैल 2026 को अदालत ने दोनों अधिकारियों को तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई और शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
2000 की घटना से जुड़ा है मामला
यह मामला 19 अक्टूबर 2000 की उस कार्रवाई से संबंधित है, जब रमनीश गीरके नेतृत्व में CBI की एक टीम ने तत्कालीन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 1985 बैच के अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के घर पर छापेमारी की थी। आरोप है कि टीम ने तड़के उनके घर का दरवाजा तोड़कर जबरन प्रवेश किया और गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं।सजा देते हुए अदालत ने क्या कहा था
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित तलाशी और गिरफ्तारी दुर्भावनापूर्ण थी तथा अधिकारियों ने अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई की। अदालत ने यह भी माना कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी अपने दो अलग-अलग आदेशों में यह टिप्पणी कर चुका है कि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण थी। हाईकोर्ट के अनुसार, अशोक कुमार अग्रवाल की गिरफ्तारी का उद्देश्य केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा दिए गए उनके पुनर्बहाली के आदेश को निष्प्रभावी करना था।
