Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे सुदूर ग्रामीण इलाकों में अब सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने लगी है। लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के प्रभाव में रहे बिरसा विकासखंड के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। विभाग के अनुसार, बीते एक महीने में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 125 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वहीं 44 बच्चों का अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी स्थिति स्वस्थ बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बिरसा ब्लॉक के कुंडेकसा, अडोरी, कोरका और बांदरी समेत आसपास के गांवों में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित पहुंच चुनौती बनी हुई थी। इन क्षेत्रों में सर्दी-खांसी, बुखार, त्वचा रोग, खसरा, स्कैबीज और मलेरिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की पहचान की जा रही है।
20 सर्वेक्षण टीमों ने घर-घर जाकर किया सर्वेक्षण
अधिकारियों के अनुसार, इन गांवों में पहली बार बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। जून 2026 में एक बच्चे की बीमारी के बाद मौत का मामला सामने आया था। बच्चे में तेज बुखार के साथ शरीर पर दाने या चकत्ते, मुंह में छाले, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, भूख न लगना, कमजोरी और झटके जैसे लक्षण पाए गए थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक सर्वे शुरू किया। ग्रामीणों तक पहुंचने के लिए 20 सर्वेक्षण टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। इसके अलावा चार पीएम जनमन एएमएमयू, 10 चिकित्सा अधिकारी और चार एंबुलेंस तैनात की गई हैं। अब तक 630 मरीजों की पहचान हुई है। इनमें 125 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया, जबकि 461 मरीजों का इलाज घर पर ही किया गया और वे स्वस्थ हो चुके हैं।
बच्चों के लिए चला खास अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के लिए भी विशेष अभियान चलाया है। सर्वे के दौरान 658 बच्चों को विटामिन-ए, ओआरएस और जिंक की खुराक दी गई। 597 बच्चों को आयरन सिरप और 521 बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियां दी गईं। वहीं 63 बच्चों को खसरे का टीका लगाया गया। अभियान के तहत कुंडेकसा, बांदरी, कोरका, घुम्मुर, अडोरी, मछुरदा, गठिया और मातला समेत 10 गांवों के करीब 980 घरों में स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है। इन इलाकों में कीटनाशक छिड़काव, इंडोर-आउटडोर फॉगिंग और लार्वा सर्वे भी कराया जा रहा है।
सरकारी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना सबसे जरूरी कदम
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों का भरोसा जीतना है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक नक्सली प्रभाव के कारण ग्रामीणों में सरकारी तंत्र और वर्दी को लेकर डर की स्थिति बनी रही। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें लगातार गांवों में जाकर लोगों को इलाज के महत्व के बारे में समझा रही हैं। प्रशासन का मानना है कि नक्सली हिंसा खत्म होने के बाद अब इन इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।
