होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के आर्थिक नतीजों पर व्यापक चर्चा लगातार जारी है। लेकिन इस चर्चा में अब तक लंबे समय तक जहाजों की नाकेबंदी के बाद होने वाले पारिस्थितिक नुकसान के जोखिम को नजरअंदाज किया गया है। हालिया शोध से पता चलता है कि फरवरी से फारस/अरब की खाड़ी में खड़े 1,500 से अधिक कमर्शियल जहाज एक गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा कर रहे हैं।
बड़ा पर्यावरणीय संकट हो रहा पैदा
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की सप्लाई ही प्रभावित नहीं हो रही है, बल्कि एक ऐसा बड़ा पर्यावरणीय संकट आकार ले रहा है जिस पर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया था। फारस की खाड़ी में बीते कई महीनों से लंगर डाले खड़े 1,500 से अधिक वाणिज्यिक जहाज पूरी दुनिया की जैव-सुरक्षा (Biosecurity) के लिए टाइम बम साबित हो सकते हैं। हालिया शोध में चेतावनी दी गई है कि महीनों से एक ही जगह स्थिर खड़े इन विशालकाय जहाजों के निचले हिस्से पर खतरनाक समुद्री परजीवी, हमलावर पौधे और संक्रामक बीमारियां तेजी से जमा हो रही हैं। जैसे ही यह संकरा समुद्री रास्ता दोबारा खुलेगा, ये जहाज दुनिया भर के विभिन्न बंदरगाहों की ओर रवाना होंगे, जिससे एक अंतरराष्ट्रीय 'बायो-सिक्योरिटी सुपर-स्प्रेडर' घटना घटने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
क्या है यह जैविक खतरा?
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के गर्म पानी में जब जहाज लंबे समय तक बेकार खड़े रहते हैं, तो उनके पतवार, पंखों और रडार प्रणाली पर बाहरी आक्रामक प्रजातियां चिपक जाती हैं। जब ये जहाज नए समुद्री क्षेत्रों और बंदरगाहों में प्रवेश करते हैं, तो ये परजीवी स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में फैल जाते हैं। इससे स्थानीय मछलियों, झींगा व समुद्री जीवों की प्रजातियां नष्ट हो जाती हैं, जिससे तटीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को भारी चपत लगती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ही क्यों बना सबसे बड़ा 'हॉटस्पॉट'?
समुद्री व्यापार के वैश्विक नक्शे पर 24 मुख्य संकीर्ण रास्ते यानी चोक पॉइंट्स हैं। इनमें से 20 रास्तों पर कोई रुकावट आने पर जहाजों का मार्ग बदला जा सकता है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य समेत केवल 4 रास्ते ऐसे हैं, जिनका दुनिया में कोई वैकल्पिक समुद्री मार्ग मौजूद नहीं है। विकल्प न होने के कारण जहाजों को महीनों तक समुद्र में ही लावारिस स्थिति में लंगर डालकर खड़े रहने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे बायोफाउलिंग का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
इतिहास में पहले भी बने ऐसे हालात
यह पहला मौका नहीं है जब जहाजों के खड़े रहने से यह खतरा पैदा हुआ हो। अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप्प होने पर दुनिया के 10% कंटेनर और 25% रीफर्ड जहाज समुद्र में महीनों खड़े रहे। 1970 का तेल संकट भी ऐसा ही उदाहरण है जब दुनिया भर में 466 तेल टैंकर बेकार खड़े कर दिए गए थे।
दक्षिण चीन सागर में हर साल मछली पकड़ने पर लगने वाले प्रतिबंधों के कारण हजारों नावें एक जगह खड़ी रहती हैं, जिससे यह जैविक संक्रमण पनपता है।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा
आंकड़ों के मुताबिक फारस की खाड़ी में 50 से अधिक गैर-देशी खतरनाक समुद्री प्रजातियां मौजूद हैं। हालांकि होर्मुज खुलने के तुरंत बाद सभी जहाज एक साथ नहीं पहुंचेंगे, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक साल के भीतर इन आक्रामक प्रजातियों को लेकर दर्जनों जहाज ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और एशियाई देशों के तटों तक पहुंच जाएंगे।
वैज्ञानिकों ने इस भयावह तबाही को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल 5 कड़े कदम उठाने की सलाह दी है:
- eDNA से जांच: जहाजों के रवाना होने से पहले उनके पानी और पतवार का 'पर्यावरणीय डीएनए' (eDNA) टेस्ट कराया जाए।
- पानी के भीतर सफाई: खाड़ी क्षेत्र छोड़ने से पहले ही जहाजों के निचले हिस्से की विशेष उपकरणों से सफाई की जाए ताकि परजीवी वहीं नष्ट हो जाएं।
- पोर्ट्स को एडवांस अलर्ट: जहाजों के गंतव्य बंदरगाहों को उनके आने की पूर्व सूचना दी जाए ताकि वे सुरक्षा जांच की तैयारी रख सकें।
- रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम: हर देश की पोर्ट अथॉरिटी त्वरित जांच और प्रतिक्रिया बल तैनात करे।
- ग्लोबल अलर्ट नेटवर्क: समुद्री सीमाओं को बचाने के लिए दुनिया भर के देश रीयल-टाइम डेटा साझा करें।
अगर समय रहते इन स्थिर जहाजों के जैविक कचरे का प्रबंधन नहीं किया गया, तो आर्थिक नुकसान से उबरने के बाद दुनिया को एक नए समुद्री 'इकोलॉजिकल संकट' से जूझना पड़ेगा।
