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Goa Water Crisis: गोवा पर मंडराया जल संकट! मानसून की बेरुखी से खाली हो रहे बांध, सरकार के पास सिर्फ एक महीने का पानी

Goa Water Crisis: गोवा में मानसून की सुस्ती से जलाशयों का पानी घट गया है। सरकार के पास केवल एक महीने का ड्रिंकिंग वाटर स्टॉक बचा है। हालांकि किसी भी इलाके में हाहाकार जैसी स्थिति नहीं है। IMD ने इस बीच एक राहत भरी खबर दी है।

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बारिश न होने से डरावने स्तर पर पहुंचे जलाशयों के आंकड़े

Photo : Times Now Digital

Goa Water Crisis: अपनी खूबसूरत बीचेस और सैलानियों के लिए मशहूर तटीय राज्य गोवा इस समय एक गंभीर प्राकृतिक चुनौती का सामना कर रहा है। राज्य में मानसून की सुस्ती और बारिश न होने के कारण पीने के पानी का संकट गहराने लगा है। गोवा सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि राज्य के पास अब केवल एक महीने तक की जरूरत को पूरा करने के लिए ही पीने के पानी का स्टॉक बचा है। गोवा के जल आपूर्ति विभाग के मंत्री सुभाष फाल देसाई ने PTI को दिए एक बयान में बताया कि बारिश की भारी कमी के कारण राज्य के विभिन्न बांधों और जलाशयों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे गिर गया है।

घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन जारी होगी सख्त एडवाइजरी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल आपूर्ति मंत्री ने जनता से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा "फिलहाल लोगों को पैनिक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हमारे पास एक महीने की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। हालांकि, मौजूदा पानी समय से पहले खत्म न हो जाए, इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को लेकर बेहद सख्त एडवाइजरी जारी करने जा रही है।" मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि इस स्थिति को देखते हुए उद्योगों सहित समाज के विभिन्न वर्गों से लगातार उनके पास फोन आ रहे हैं और लोग जल आपूर्ति की स्थिति को लेकर पूछताछ कर रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए जल आपूर्ति विभाग जल्द ही जल संसाधन विभाग के मंत्री सुभाष शिरोडकर के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेगा, जिसमें राज्यभर के बांधों में उपलब्ध पानी के वास्तविक आंकड़ों का मूल्यांकन किया जाएगा।

गोवा के प्रमुख बांधों की स्थिति चिंताजनक

राज्य के अलग-अलग हिस्सों को पानी सप्लाई करने वाले बड़े जलाशयों की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है:

सेलाउलिम बांध (Selaulim Dam): पूरे दक्षिण गोवा, कुशावती जिले और उत्तर गोवा के कुछ हिस्सों की जीवनरेखा माना जाने वाला यह बांध इस समय अपनी क्षमता का केवल 27 प्रतिशत ही भरा है। इसकी दैनिक जल निकासी क्षमता 280 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है।

अंजुनेम बांध (Anjunem Dam): उत्तर गोवा के सत्तारी तालुका में स्थित और गोवा-कर्नाटक सीमा पर बने इस बांध की स्थिति सबसे खराब है। यहां पानी का स्टॉक घटकर महज 9.9 प्रतिशत रह गया है। इसकी क्षमता 50 MLD की है, जिसका पानी पडोशे और दत्तावाड़ी प्लांट में ट्रीट किया जाता है।

महैसल बांध (Mhaisal Dam): उत्तर गोवा के पोंडा के पास शिरोडा में स्थित इस बांध का जलस्तर 19 प्रतिशत पर आ गया है, जिसकी क्षमता 10 से 14 MLD पानी देने की है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि सुदूर दक्षिण में स्थित कानाकोना का 'चापोली बांध' और उत्तर गोवा के बारदेज़ तालुका को पानी देने वाले 'अमथाने जलाशय' में अभी पानी का अच्छा स्टॉक मौजूद है, जिससे इन इलाकों में फिलहाल किल्लत नहीं होगी।

मौसम विभाग ने जताई राहत की उम्मीद

गोवा सरकार का कहना है कि उन्होंने पानी के वितरण सिस्टम को काफी सुधारा है, जिससे फिलहाल किसी भी इलाके में हाहाकार जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन यदि आने वाले समय में भी बारिश नहीं होती है, तो चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक राहत भरी भविष्यवाणी की है, जिसके अनुसार अगले सप्ताह के अंत तक राज्य में मानसूनी गतिविधियां दोबारा जोर पकड़ सकती हैं और झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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