गाजियाबाद

Ghaziabad Name Change Update: 'गजप्रस्थ या दूधेश्वर नगरी', क्या कहलाएगा गाजियाबाद? जानिए किस वजीर के नाम पर पड़ा नाम

Ghaziabad Name Change Update: इलाहाबाद की तरह गाजियाबाद का नाम भी बदलने की मांग उठी है। इसके लिए गाजियाबाद नगर निगम में प्रस्ताव भी पास हो गया है। अब इंतजार सिर्फ प्रदेश की योगी सरकार की मुहर लगने की है।

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश सरकार लगातार मुगलों या मुस्लिम शासकों के नाम पर रखे गए शहरों के नाम बदलने का सिलसिला जारी किए हुए है। अब कुछ दिनों से एनसीआर के जिले गाजियाबाद का नाम सुर्खियों में है। इस बड़े शहर का नाम बदलने को लेकर मंगलवार को गाजियाबाद नगर निगम की सदन बैठक में प्रस्ताव को पास कर दिया गया है। अब सिर्फ प्रदेश सरकार की मुहर लगने का इंतजार है। अगर, ऐसा होता है तो लगभग 284 साल से मुगल शासन के वजीर गाजीउद्दीन की याद दिलाने वाले जिले का नाम अब बदल दिया जाएगा।

इस वजीर के नाम पर पड़ा नाम

गाजीउद्दीन की याद में रखे गए पुराने जिलों में गिने जाने वाले शहर गाजियाबाद का नाम अब बदला जा सकता है। इसको लेकर शासन-प्रशासन की जरूरी कार्यवाही जारी है। इस क्रम में कई नामों का सुझाव आगे भेजा गया है, जिसमें दूधेश्वर नगरी सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसको लेकर मेयर सुनीता दयाल की पार्षदों संग बैठक भी हो चुकी है। हालांकि, जिले का नाम क्या होगा? यह अभी भी तय नहीं हो पाया है।

किसके नाम पर पड़ा नाम

इतिहासकारों की मानें तो 1740 ई में मुगल शासन के वजीर गाजीउद्दीन ने गाजीउद्दीन नगर नाम से शहर बनाया था। बाद में इसका नाम छोटा कर इसे गाजियाबाद कर दिया गया। 14 नवंबर 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने गाजियाबाद को मेरठ से अलग कर जिला घोषित किया, लेकिन नाम नहीं बदला। अब इतने साल बाद इसके नाम को लेकर माहौल गरमाया है। अगर, इसी तरह मांग उठती रही तो इलाहाबाद की तरह गाजियाबाद भी नए नाम से पुकारा जाने लगेगा।

इस पार्षद ने उठाई मांग

हालांकि, सदन में दूधेश्वर नगर करने की भी मांग उठी है। नगर निगम में वार्ड संख्या-100 के पार्षद संजय सिंह की ओर से यह प्रस्ताव लाया गया, उन्होंने गाजियाबाद का नाम बदलकर गजनगर अथवा हरनंदी नगर करने की मांग की। देखना है सरकार इस नए नाम पर कब अपनी मुहर लगाती है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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