शहर

लखनऊ-कानपुर और दिल्ली-देहरादून के बाद अब Delhi Mumbai Expressway की हालत खराब, 80 किमी में 40 जगह मेजर रिपेयरिंग

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बाद अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भी सड़क धंसने और दरारें आने की खबर है। एक्सप्रेसवे के दक्षिण गुजरात हिस्से में लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में 40 स्थानों पर मेजर रिपेयरिंग चल रही है।

Image

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की सड़क में आई दरारें, सड़क धंसी

Delhi Mumbai Expressway: देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दक्षिण गुजरात हिस्से में बड़े पैमाने पर मरम्मत का काम चल रहा है। सूरत जिले के एना (पलसाणा) से भरूच के बीच लगभग 80 किलोमीटर के हिस्से में 40 जगहों पर मेजर रिपेयरिंग का काम किया जा रहा है। इनमें भरूच की ओर जाने वाले मार्ग पर 21 और भरूच से एना की तरफ आने वाले मार्ग पर 19 स्थान जगहें हैं।

सबसे बड़ा रिपेयरिंग कार्य भरूच-किम सेक्शन में पून गांव के पास किया जा रहा है। यहां 2 किलोमीटर से अधिक लंबे RCC रोड हिस्से को उखाड़कर फिर से बनाया जा रहा है। यहां सड़क की सतह पर दरारें आने और कुछ जगहों पर सड़क धंसने के बाद मरम्मत की जरूरत पड़ी है।

80 किलोमीटर में 40 जगहों पर काम

लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपये की लागत से बन रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को देश के प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई के बीच यात्रा समय और लॉजिस्टिक लागत को कम करना है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के अपेक्षाकृत नए हिस्से में इतनी बड़ी संख्या में मरम्मत कार्य शुरू होना सड़क निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दक्षिण गुजरात में चल रहे काम में कहीं सड़क की ऊपरी सतह की मरम्मत की जा रही है तो कहीं ज्यादा क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाकर दोबारा निर्माण किया जा रहा है। पून गांव के पास RCC रोड को पूरी तरह से हटाकर नया निर्माण किया जाना इस बात का संकेत है कि कुछ हिस्सों में समस्या सिर्फ सतही मरम्मत तक सीमित नहीं है।

दूसरे एक्सप्रेसवे से भी मिली सीख

हाल के दिनों में नए एक्सप्रेसवे पर सामने आई गंभीर समस्याओं ने निर्माण गुणवत्ता, जल निकासी, बेस लेयर और सड़क की डिजाइन-निर्माण प्रक्रिया की निगरानी को लेकर चर्चा तेज की है। ताजा उदाहरण लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे है, जिस पर उन्नाव हिस्से के पास सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद सुधार कार्य किए जा रहे हैं। यहां उद्घाटन के एक महीने से भी कम समय में सड़क के धंसे जाने से सरकार और NHAI की जमकर किरकिरी हुई है। इसी तरह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भी उद्घाटन के तीन महीने के अंदर ही शामली के पास सड़क पर गड्ढे हो गए। इन अनुभवों ने भी यह सवाल उठाया है कि नई सड़कों के निर्माण के साथ उनकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक मजबूती की निगरानी कितनी प्रभावी है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़े स्तर पर मरम्मत से फिलहाल यात्रियों को परेशानी हो सकती है, लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस सड़क को लंबे समय तक भारी यातायात और तेज रफ्तार वाले वाहनों का दबाव झेलना है, उसमें इतनी जल्दी बड़े रिपेयरिंग कार्य की जरूरत क्यों पड़ी। निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की तरफ से मरम्मत के कारणों तथा सड़क की गुणवत्ता की जांच से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ही तस्वीर और साफ हो पाएगी।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

और पढ़ें
End of Article