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Delhi News: 63 साल से बंद ट्राम फिर से चलाने की तैयारी, क्या फिर बिछेंगी सड़कों पर पटरी?

राजधानी दिल्ली में 63 साल से बंद ट्राम सेवा को फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। पुरानी दिल्ली की संकरी सड़कों और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए नई तरह की ट्राम चलाने की योजना बनाई जा रही है।

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पुरानी दिल्ली में कभी इस तरह चलती थी ट्राम

Delhi News: आज भी दिल्ली के ज्यादातर लोग पुरानी दिल्ली को ही असली दिल्ली कहते हैं। पुरानी दिल्ली की वो तंग गलियां और उन गलियों में सदियों पुरानी कपड़े, खाने-पीने और मसालों आदि की दुकानें। पुरानी दिल्ली आज भी उसी तरह जीवंत है। लेकिन एक पुरानी चीज जो पुरानी दिल्ली से पिछले 63 वर्षों से गायब है, उसे वापस लाने की तैयारी एक बार फिर से हो रही है। जी हां, ट्राम कभी पुरानी दिल्ली की पहचान हुआ करती थी। खड़-खड़ करती ट्राम जब पुरानी दिल्ली की गलियों से गुजरती तो उसके दोनों ओर लोग ठिठक जाते थे। सरकार के प्रयास से एक बार फिर पुरानी दिल्ली में ट्राम चलाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्रमुख हिंदी अखबार दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अगर सब ठीक रहा तो पुरानी दिल्ली में आप फिर से ट्राम का सफर कर पाएंगे, लेकिन इस बार 63 साल पहले चली आखिरी ट्राम से इसमें बहुत कुछ नया होगा।

पुरानी दिल्ली में आखिरी बार दिसंबर 1963 में ट्राम चली थी। तब से 63 साल बीत गए, ट्राम की पटरी भी पुरानी दिल्ली से गायब हो गई। उस समय 10 साल के जिस बच्चे ने ट्राम का सफर किया होगा, वह भी आज 73 साल के बुजुर्ग हो चुके हैं। वैसे तो पुरानी दिल्ली से ट्राम की यादें भी मिट चुकी हैं और बाद के लोगों को तो यह भी नहीं पता कि कभी दिल्ली में ट्राम भी चलती थी। लेकिन जिन बुजुर्गों ने अपने बचपन में पुरानी दिल्ली की ट्राम का सफर किया है, वह फिर से ट्राम चलने की खबर से निश्चित तौर पर खुश होंगे। अब समय बदल चुका है और अगर पुरानी दिल्ली में फिर से ट्राम चलती है तो वह भी बदली-बदली सी होगी। इस बार पारंपरिक ट्राम की तरह सड़क पर पटरियां बिछाने के बजाय ट्रैकलेस ट्राम चलाई जा सकती है।

Delhi Tram

पुरानी दिल्ली के अहम इलाकों को जोड़ती थी ट्राम

पुरानी दिल्ली की पतली और संकरी गलियों के बारे में तो आप जानते ही हैं, जहां अपनी गाड़ी से जाने के बारे में आप सोच भी नहीं सकते। इन्हीं ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों में परिवहन सुविधा बढ़ाने के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हाल में इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम की बैठक में प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत ट्राम की तकनीक, रूट, क्षमता और संचालन से जुड़े पहलुओं की व्यवहार्यता परखी जाएगी।

सड़क पर पटरी नहीं ट्रैकलेस ट्राम

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में पारंपरिक ट्राम की तरह सड़क के बीच लोहे की पटरियां बिछाने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि ट्रैकलेस इलेक्ट्रिक ट्राम सड़क पर बनी मार्किंग, सेंसर या जीपीएस जैसी तकनीक की मदद से निर्धारित मार्ग पर चल सकती है। इससे पुरानी दिल्ली की संकरी और घुमावदार सड़कों पर इसे चलाने की संभावना और बढ़ती है।

ऐसी हो सकती है नई ट्राम

ऐसी हो सकती है नई ट्राम

प्रस्तावित ट्राम इलेक्ट्रिक और जीरो कार्बन इमीशन वाली होगी। विचार है कि इसे छत पर लगे लिथियम-आयन बैटरी पैक से चलाया जाए। हालांकि, इसकी तकनीकी संरचना, क्षमता और परिचालन मॉडल को अंतिम रूप देने से पहले विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन (Detailed Feasibility Study) किया जाना बाकी है।

किन इलाकों को जोड़ा जाएगा?

शुरुआती तौर पर ट्राम रूट में दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद, भीड़भाड़ वाला चावड़ी बाजार, Chandani Chowk, लाल किला और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे अहम स्थानों को जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इन भीड़भाड़ वाले इलाकों को देखते हुए ट्राम की गति सामान्य सड़क यातायात की तुलना में सीमित रखने की संभावना है।

रूट की लंबाई-चौड़ाई, ट्राम की क्षमता, सीटों की संख्या और कितने स्टॉप होंगे, यह अभी नहीं हुआ है। लेकिन शुरुआती चरण में दोनों विपरीत दिशाओं में दो ट्राम चलाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इन सभी पहलुओं पर फिजिबिलिटी स्टडी के बाद ही फैसला लिया जाएगा।

एक समय पुरानी दिल्ली में ट्राम यातायात का प्रमुख साधन थी

एक समय पुरानी दिल्ली में ट्राम यातायात का प्रमुख साधन थी

दिल्ली में कब चली थी पहली ट्राम

दिल्ली मुगलों के समय भी देश की राजधानी थी और बाद में साल 1911 में अंग्रेज भी अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले आए थे। लेकिन अंग्रेजों ने राजधानी दिल्ली लाने से पहले ही पुरानी दिल्ली में ट्राम सेवा की शुरुआत कर दी थी। जी हां, दिल्ली की पहली ट्राम 6 मार्च 1908 को चली थी। इसके बाद यह ट्राम देश के आजाद होने के बाद भी लगातार चलती रही। साल 1963 यानी आजादी के करीब 16 साल बाद पुरानी दिल्ली की इस ट्राम सेवा को बंद कर दिया गया। इस तरह से दिल्ली में लगभग 55 साल तक ट्राम चली, जिसे बंद हुए भी अब 63 साल हो चुके हैं।

ट्राम के लिए दिल्ली की पहल

साल 2014 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग के कार्यकाल में पुरानी दिल्ली में ट्राम सेवा फिर से बहाल करने के प्रयास तेज हुए थे। उस समय तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब 12 साल बाद ट्रैकलेस ट्राम के जरिए उन अड़चनों को दूर करने का विकल्प तलाशा जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ परिवहन सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि चांदनी चौक और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर पुरानी दिल्ली में हेरिटेज टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है। हालांकि, योजना कब तक और किस तरह से परवान चढ़ेगी यह सब डिटेल फिजिबिलिटी स्टडी और संबंधित एजेंसियों के अंतिम निर्णय के बाद ही साफ हो पाएगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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