बिजनेस

Mutual Fund से बन सकते हैं अमीर! SIP से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इन बातों का रखें बस ख्याल

SIP से निवेश में अनुशासन बना रहता है और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच लगातार निवेश करने में मदद मिलती है। एसआईपी से लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।

Image

ज्यादा रिटर्न के लिए SIP को लेकर इन बातों का रखें खास ध्यान (AI Generated Image)

आज के समय में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करने के लिए SIP (Systematic Investment Plan) एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है। इसकी खासियत यह है कि इसमें निवेशक एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय हर महीने या तय अंतराल पर एक निश्चित राशि निवेश कर सकता है। इससे निवेश में अनुशासन बना रहता है और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच लगातार निवेश करने में मदद मिलती है। हालांकि, एसआईपी से लंबे समय में बड़ा फंड बनाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है-

जल्दी शुरू करें SIP

SIP जितनी जल्दी शुरू की जाएगी, निवेश को बढ़ने के लिए उतना ज्यादा समय मिलेगा। छोटी उम्र में शुरू किया गया नियमित निवेश लंबे समय तक जारी रहने पर कंपाउंडिंग का लाभ उठा सकता है।

वित्तीय लक्ष्य से जोड़ें SIP

SIP को किसी खास लक्ष्य से जोड़ना निवेश को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, आप रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने, यात्रा या किसी अन्य बड़े खर्च के लिए अलग-अलग SIP निर्धारित कर सकते हैं। हर लक्ष्य का समय और जोखिम क्षमता अलग हो सकती है।

Step-Up SIP का विकल्प चुनें

समय के साथ आमदनी बढ़ने पर SIP की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। Step-Up SIP या Top-Up SIP के जरिए हर साल एक तय रकम या प्रतिशत से निवेश बढ़ाया जा सकता है। इससे निवेश राशि धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी और बढ़ती आमदनी के साथ निवेश की क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सही SIP Frequency चुनें

SIP में निवेश साप्ताहिक, मासिक या तिमाही आधार पर किया जा सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए मासिक SIP सुविधाजनक हो सकती है, जबकि जिन लोगों की आमदनी अलग-अलग अंतराल पर आती है, वे अपनी आय के अनुसार तिमाही विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, SIP की Frequency से ज्यादा महत्वपूर्ण नियमितता है।

बाजार गिरने पर SIP बंद न करें

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है। बाजार गिरने पर कई निवेशक घबरा जाते हैं और अपनी SIP रोक देते हैं। लेकिन SIP का उद्देश्य ही अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में नियमित निवेश करना है। जब बाजार नीचे होता है, तो निश्चित निवेश राशि से ज्यादा यूनिट खरीदी जा सकती हैं। वहीं बाजार बढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं। इस तरह लगातार निवेश Rupee Cost Averaging में मदद करता है।

पोर्टफोलियो में रखें डायवर्सिफिकेशन

पूरी रकम को केवल एक तरह के म्यूचुअल फंड में लगाने के बजाय अलग-अलग फंड कैटेगरी पर विचार किया जा सकता है। लंबे समय के लक्ष्य और ज्यादा ग्रोथ क्षमता के लिए Equity SIP पर विचार किया जा सकता है। Debt फंड अपेक्षाकृत स्थिरता के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जबकि Hybrid फंड इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण देते हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article